तवांग में प्राकृतिक खेती पर ‘कृषि सखियों’ के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

तवांग (अरूणाचल प्रदेश) । राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के अंतर्गत सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (Community Resource Persons – CRPs), जिन्हें लोकप्रिय रूप से कृषि सखियां कहा जाता है, के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज तवांग में कृषि विभाग द्वारा सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 36 क्लस्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली 72 सीआरपी, बायो-रिसोर्स सेंटर के उद्यमियों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए तवांग के जिला कृषि अधिकारी पेमा डेचेन ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और प्राकृतिक खेती के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती एक टिकाऊ कृषि पद्धति है, जो मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्स्थापित करने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

तकनीकी सत्र के दौरान कीट वैज्ञानिक के.बी. कायस्थ ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैविक पदार्थों के उचित प्रबंधन और मिट्टी में जैविक गतिविधियों को बढ़ावा देकर मिट्टी की गुणवत्ता और भौतिक संरचना को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने विविध फसल प्रणाली तथा समृद्ध बायोमास पुनर्चक्रण को टिकाऊ कृषि के प्रमुख घटक बताया।

कार्यक्रम में संसाधन व्यक्ति के रूप में भाग लेते हुए सी.के. सिंह, एसएमएस (एग्रोनॉमी), ने प्राकृतिक खेती के अंतर्गत विभिन्न कृषि पद्धतियों की जानकारी दी और प्रभावी फसल प्रबंधन तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया। वहीं लक्ष्मीप्रिया बोरा, एसएमएस (पौधा संरक्षण), ने प्राकृतिक तरीकों से कीट एवं रोग प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी देते हुए पर्यावरण-अनुकूल उपायों पर जोर दिया, जिससे रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता कम होती है।

इस अवसर पर चिमेई ड्रोक्कार, एडीओ जांग और ताशी पांदेन, एडीओ क्यिडफेल ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया और सीआरपी को अपने-अपने क्लस्टरों में प्राकृतिक खेती को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रशिक्षुओं ने संसाधन व्यक्तियों से अपने प्रश्न पूछे और विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों की क्षमता को मजबूत करना है, ताकि वे जिले में किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने में प्रभावी सहयोग प्रदान कर सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published.