इंदौर। सत्य, न्याय, नीति और मातृशक्ति की सुरक्षा ही छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज की मूल अवधारणा रही है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते ने व्यक्त किए। वे “समर्थ भारत की आधारशिला हिंदवी स्वराज” विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
यह कार्यक्रम श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक मंडल पुणे और अर्चना प्रकाशन भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर गिरीश अवधूत जोशी द्वारा लिखित पुस्तक अनादि समर का भी विमोचन किया गया।
अपने उद्बोधन में दीपक विस्पुते ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की कार्यशैली सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनमानस के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का संपूर्ण जीवन राष्ट्र, धर्म और समाज की रक्षा के लिए समर्पित रहा।
उन्होंने शिवाजी महाराज के जन्म से लेकर भारत की स्वतंत्रता तक के ऐतिहासिक कालखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत की वर्तमान भौगोलिक संरचना कहीं न कहीं शिवाजी महाराज की हिंदवी स्वराज्य की दूरदर्शी कल्पना से जुड़ी हुई दिखाई देती है।
विस्पुते ने कहा कि “स्वधर्म, स्वदेशी और स्वराज” हमारी स्वाधीनता का मूल मंत्र है। यह शिवाजी महाराज की दूरदृष्टि का ही परिणाम है कि आज हम एक विशाल और सशक्त भारत को देख रहे हैं।
कार्यक्रम में पुणे से पधारे विक्रम सिंह मोहिते ने कहा कि शिवाजी का इतिहास केवल मराठा या मराठी समाज का इतिहास नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत का इतिहास है। उन्होंने कहा कि हिंदवी स्वराज्य की स्थापना में लगभग 180 वर्षों के संघर्ष और योगदान ने भारतीय इतिहास को एक नया मोड़ दिया।
मोहिते ने शिवाजी महाराज की युद्धनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्याभिषेक के बाद वर्ष 1676 से 1678 के बीच उन्होंने दक्षिण भारत में महत्वपूर्ण अभियान चलाया। इसके बाद उनकी रणनीति के अनुसार छत्रपति शाहूजी महाराज और बाजीराव पेशवा के नेतृत्व में मराठा साम्राज्य का विस्तार नर्मदा के पार उत्तर भारत तक हुआ, जो अटक से कटक तक शासन की परिकल्पना को दर्शाता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर सलाहकार एवं सत्यसाई विद्यालय संस्थान के प्रमुख त्रिभुवन सचदेव ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में शिवाजी महाराज की शिक्षा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचारों को विस्तार से रखा।
इंदौर के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव गिरीश जोशी द्वारा लिखित पुस्तक “अनादि समर” का औपचारिक विमोचन भी किया गया।
इस अवसर पर हिंदवी साम्राज्य के इतिहास पर आधारित तीन अन्य पुस्तकों का भी परिचय कराया गया। इन पुस्तकों का विमोचन पूर्व में नई दिल्ली में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा किया जा चुका है।

