यूनिसेफ और आईसीसी ने बच्चों और उनके खेलने के अधिकार को केंद्र में रखा

अहमदाबाद। यूनिसेफ–आईसीसी साझेदारी ने पुरुष टी20 क्रिकेट विश्व कप के दौरान बच्चों के सशक्तिकरण और उनके खेलने के अधिकार को प्रमुखता से उजागर किया। यूनिसेफ इंडिया की चीफ़ ऑफ़ फ़ील्ड सर्विसेज़, सोलेदाद हेरेरो ने अहमदाबाद के दो युवा खिलाड़ियों के साथ आज नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत-नीदरलैंड मैच की शुरुआत में “ट्रॉफी वॉक” किया।

सोलेदाद ने मीडिया से बातचीत में कहा, “क्रिकेट समानता और समावेशन का एक शक्तिशाली माध्यम है। यह हमें याद दिलाता है कि हर बच्चा, हर जगह, एक निष्पक्ष अवसर का हकदार है। यूनिसेफ को पुरुषों के टी20 विश्व कप 2026 के दौरान अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के साथ साझेदारी करने पर गर्व है, जिसका एक सरल और प्रमुख उद्देश्य है: बच्चों के खेलने के अधिकार को बढ़ावा देना।”

उन्होंने आगे कहा, “खेल आने वाली पीढ़ी को सशक्त बनाता है। बच्चे खेल के माध्यम से ही सबसे बेहतर तरीके से सीखते हैं, खोजते हैं और दुनिया को समझते हैं। खेल वह माध्यम भी है जिसके जरिए वे आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान और पारस्परिक कौशल विकसित करते हैं, साथ ही आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन को भी मजबूत करते हैं।”

बच्चों के लिए सुरक्षित स्थानों के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “सुरक्षित महसूस करना बच्चों को खोजने, प्रयास करने, असफल होने और फिर से प्रयास करने की अनुमति देता है। जब खेल डर के बिना होता है, तो सीखना चिंता के बिना होता है और आत्मविश्वास तथा अपनापन विकसित करने का अवसर मिलता है।”

आईसीसी और यूनिसेफ ने आज समाज और समुदायों से आह्वान किया कि वे बच्चों के खेलने के अधिकार की रक्षा करें और स्कूलों, समुदायों तथा पड़ोस में सुरक्षित खेल स्थलों का निर्माण करें।

‘खेलने के अधिकार’ के संदेश को अहमदाबाद के दो उभरते खिलाड़ियों ने और मजबूत किया—15 वर्षीय रंगी नियति मोहनलाल और 14 वर्षीय रे अंकित उमाशंकरभाई, जो ट्रॉफी वॉक का हिस्सा बने। रंगी ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य के लिए गौरव हासिल किया है, जबकि अंकित एक होनहार युवा क्रिकेटर हैं।

यूनिसेफ और आईसीसी 2015 से “क्रिकेट फॉर गुड” पहल के माध्यम से एक दशक से अधिक समय से साथ काम कर रहे हैं। क्रिकेट की पहुंच का उपयोग करते हुए यह साझेदारी बच्चों के अधिकारों और कल्याण का समर्थन करती है। इन वर्षों में, इसने स्वच्छता, सशक्तिकरण, शिक्षा और खेलने के अधिकार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई है, यह सुनिश्चित करते हुए कि लड़कियों और लड़कों दोनों को समान अवसर मिलें।

 

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