नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में एक चुनावी सभा में ममता सरकार को किसान विरोधी सरकार करार दिया। श्री शाह ने कहा कि बंगाल के आलू उत्पादक किसानों के लिए ओडिशा, झारखंड के बाजार बंद कर ममता सरकार ने किसानों की आजीविका पर निर्मम प्रहार किया है।
श्री शाह के बयान को केंद्र में रखकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने भी ममता सरकार को घेरा है। श्री प्रधान ने केंद्रीय गृह मंत्री की बात का उल्लेख करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा है कि ममता बनर्जी सरकार के ‘अहंकार’ के कारण पश्चिम बंगाल के किसान अपनी ही मेहनत का सही मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार ने पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा और झारखंड के बाजारों के दरवाजे बंगाल के किसानों के लिए बंद कर दिए हैं, जो अन्नदाता की आजीविका पर एक क्रूर प्रहार है।
चुनावी सभा में श्री शाह ने आरोप लगाया कि टीएमसी के शासन में बिचौलियों का तंत्र फल-फूल रहा है, जबकि किसान खेत में पसीना बहाकर भी अपनी मेहनत का उचित मूल्य नहीं पा पा रहे हैं।उन्होंने कहा कि ममता सरकार का ध्यान किसानों के हित के बजाय सिंडिकेट चलाने पर है, जिससे राज्य में आलू जैसे प्रमुख फसलों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। माननीय गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि जैसे ही पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी, बंगाल का आलू ओडिशा, झारखंड सहित पूरे देश के बाज़ारों में जाएगा।
श्री प्रधान ने केंद्रीय गृह मंत्री की बातों का उल्लेख करते हुए लिखा है कि भाजपा सरकार किसानों की फसल का पूरा मूल्य और उनके परिश्रम का उचित सम्मान सुनिश्चित करेगी, जो बंगाल के किसान के सम्मान की पुनर्स्थापना का संकल्प है। भाजपा नेतृत्व ने बंगाल के किसानों को विश्वास दिलाया है कि अब और अन्याय नहीं होगा और राज्य में ‘परिवर्तन’ के बाद किसानों को उनके हक का अधिकार मिलेगा।

