गाजियाबाद। वेव सिटी के खिलाफ चलाए जा रहे अवैध तरीके से धरना—प्रदर्शन को पुलिस द्वारा हटाए जाने के विरोध में दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता ने जो आरोप लगाए हैं वह निराधार है और ऐसी स्थिति में यह धरना—प्रदर्शन अवैध प्रतीत होता है। स्थानीय ग्रामीण प्रमोद डवास द्वारा किसानो के धरना को पुलिस द्वारा हटाये जाने के विरूद्ध दायर की गयी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के आरोप को अवैध करार दिया है।
गौरतलब है कि स्थानीय किसानो द्वारा दिनॉक 20.05.2014 के समझौता को लागू करने के लिए 15 मार्च 2025 से वेव सिटी के खिलाफ धरना प्रर्दशन किया जा रहा था। किसान सड़क पर धरना दे रहे थे। वेव सिटी द्वारा प्रकरण की शिकायत बीएनएस की धारा 252 के अर्न्तगत सहायक पुलिस आयुक्त वेव सिटी से की। किसानो को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद सहायक पुलिस आयुक्त मोदीनगर ज्ञान प्रकाश राय द्वारा अपने आदेश दिनॉक 25.06.2025 में पाया गया कि स्थानीय किसान वेव सिटी से 57 मीटर रोड़ को जबरन अतिक्रमण कर बैठे हुए है। जिससे आम जन के अलावा स्कूल के बच्चे, एम्बुलेंस आदि को परेशानी हो रही थी। सहायक पुलिस आयुक्त मोदीनगर ज्ञान प्रकाश राय द्वारा अपने आदेश मे किसानों को 3 दिन में धरना स्थल से उठने का समय दिया गया था। परन्तुं किसानों ने आदेश का पालन नही किया तो पुलिस द्वारा दिनाँक 03.08.2025 को कार्यवाही कर किसानों को हटा दिया गया। साथ ही कुछ किसानों को जिनको पुलिस ने गिरफ्तार किया था 06.08.2025 को बेल पर छोड़ दिया गया।
किसानों को पुलिस द्वारा हटाने के विरूद्ध स्थानीय निवासी प्रमोद डवास द्वारा मा० उच्च न्यायालय में याचिका सं० 696 / 2025 योजित की जिसे सुनवाई उपरान्त दिनाँक 25.08.2025 को मा० उच्च न्यायालय द्वारा पोषणीय न होने के कारण निरस्त कर दिया गया। याचिका के निरस्त होने से अब 8% के भूखण्ड़ नही दिये जा सकते क्योकि समझौता 20.05.2014 के बिन्दु सं० 06 के अनुसार समय सीमा निकल चुकी है। किसानो द्वारा याचिका के बिन्दुं सं0 07 मे समझौता को लागू कराने के विषय में कहा गया था। मा० उच्च न्यायालय ने याचिका को निरस्त कर दिया है। उधर धरना स्थल पर पुलिस बल का सख्त पहरा है। अगर किसान किसी तरह का उपद्रव करते हैं तो किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन तैयार है।

