भोपाल। आरोग्य भारती भोपाल महानगर द्वारा आयोजित मासिक स्वास्थ्य व्याख्यानमाला का 11वां वार्षिकोत्सव आज अंजनी सभागार, रवीन्द्र भवन, पॉलिटेकनिक चौराहा में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में चिकित्सक, समाजसेवी, विद्यार्थी, स्वास्थ्य-जागरूक नागरिक एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक शुरुआत और दीप प्रज्ज्वलन
कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चों द्वारा प्रस्तुत भगवान श्रीराम पर आधारित नाटिका से हुआ, जिसने उपस्थित जनों को भारतीय संस्कृति और मर्यादा का संदेश दिया। इसके बाद अतिथियों ने भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की।
सारस्वत अतिथि का उद्बोधन
सारस्वत अतिथि डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय (राष्ट्रीय संगठन सचिव, आरोग्य भारती) ने संस्था की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2002 में आरोग्य भारती की स्थापना हुई थी और आज यह संगठन देश के प्रत्येक प्रांत में सक्रिय है। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार नहीं, बल्कि हर नागरिक को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने हेतु प्रेरित करना है।
मुख्य अतिथि के विचार
मुख्य अतिथि श्री स्वांत रंजन जी (अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख, लखनऊ) ने शरीर को साधना का सर्वोच्च साधन बताया। उन्होंने कहा, “यदि शरीर स्वस्थ रहेगा तभी हम धर्म, समाज और राष्ट्र की सेवा पूरी क्षमता से कर पाएंगे।”
ऋतुओं के अनुसार संयमित आहार पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि घर की रसोई ही सबसे सुरक्षित औषधालय है। दिनचर्या में ब्रह्ममुहूर्त में उठने और व्यायाम की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि सुबह की प्राणवायु पूरे दिन को ऊर्जावान बना देती है।
डॉ. चन्द्रप्रकाश द्विवेदी का वक्तव्य
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात चिंतक, साहित्यकार एवं फिल्म निर्देशक डॉ. चन्द्रप्रकाश द्विवेदी (प्रसिद्ध “चाणक्य” धारावाहिक से चर्चित) ने “भारतीय सांस्कृतिक अवधारणा में स्वास्थ्य चिंतन एवं वर्तमान संदर्भ” पर अपने विचार रखते हुए कहा, “विज्ञान यानी विशेष ज्ञान है, लेकिन जब उसमें संवेदना जुड़ती है तभी समाज का वास्तविक निर्माण होता है।” चिकित्सा को उन्होंने केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना से जुड़ा कर्तव्य बताया।
तनाव और प्रतिस्पर्धा को आज की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि आत्म-अवलोकन ही आनंदमय जीवन का वास्तविक मंत्र है। भगवान बुद्ध और गांधीजी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को आवश्यकता से अधिक पाने की चाह दुख का कारण है, जबकि संतोष और आत्मस्वीकृति ही सुख का मूल है। उन्होंने नया दृष्टिकोण रखा—“I am not ok, You are not ok, but We are ok”—और समझाया कि समाज व जीवन का संतुलन इसी विचार से संभव है।
अध्यक्षीय उद्बोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूज्य श्रीमद् जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्य जी महाराज ने कहा, “अच्छे राष्ट्र की रचना तभी संभव है जब हम राष्ट्र को आरोग्य बनाएंगे।” आहार, विहार और व्यवहार की शुद्धता को उन्होंने जीवन का मूल आधार बताया।
सम्मान और संकल्प
इस अवसर पर समाजसेवी अजय रघुवंशी जी को “धन्वंतरि सेवा सम्मान” से सम्मानित किया गया, जिन्होंने अनेक कैंसर रोगियों का नि:शुल्क उपचार कराया है। कार्यक्रम का संचालन मिहिर कुमार ने किया और आभार प्रदर्शन मध्यभारत प्रांत अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि वे “My Health is My Responsibility” के मंत्र को जीवन में अपनाएंगे और समाज को स्वास्थ्य-जागरूक बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

