त्रिपुरा में रिकॉर्ड 74 फीसदी मतदान

अगरतल्ला। त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गए. शाम चार बजे तक हुई वोटिंग में 59 सीटों के 3214 मतदान केंद्रों में रिकॉर्ड 74 फीसदी मतदान हुआ. चुनाव आयोग ने बताया कि चुनाव के दौरान कहीं से भी किसी तरह की हिंसा या उपद्रव की कोई खबर नहीं मिली. प्रदेश की चरीलम विधानसभा सीट से माकपा के उम्मीदवार रामेंद्र नारायण देब बर्मा की पांच दिन पहले हुई मौत के कारण मतदान को टाल दिया गया है. अब इस सीट पर आगामी 12 मार्च को मतदान होगा.
इन चुनावों में कुल 307 उम्मीदवार दौड़ में हैं. माकपा 57 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि अन्य वामपंथी दल आरएसपी, फॉरवर्ड ब्लॉक और भाकपा ने एक-एक सीट पर उम्मीदवारी दर्ज कराई है. कांग्रेस ने 59 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए. मतों की गिनती तीन मार्च को होगी. त्रिपुरा में चुनावों में पहली बार वीवीपैड मशीनों का इस्तेमाल किया गया. ईवीएम में अपने पसंदीदा उम्मीदवार के निशान के आगे बटन दबाकर मतदाताओं को अपने वोट का सत्यापन करन के लिए वीवीपैड से पर्ची निकाल कर भी दिखाई गई. चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान के दौरा काफी संख्या में ईवीएम खराब होने की सूचना मिली थी, लेकिन जब मौके पर जाकर देखा गया तो ज्यादातर सूचनाएं गलत थीं. कुछ जगहों पर ईवीएम में खराबी आई, जिन्हें फौरन बदल दिया गया.
चुनावों में बीजेपी के प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए थे. इस बार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां प्रचार किया. उन्होंने राज्य में चार रैलियों को संबोधित किया. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, नितिन गडकरी और स्मृति ईरानी व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे दिग्गज नेताओं ने भी पार्टी के लिए प्रचार किया.
ऐसा पहली बार है कि बीजेपी यहां सभी सीटों से चुनाव लड़ रही है. 51 सीटों पर उसने खुद अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि 9 सीटें अपने सहयोगी दल IPFT के लिए छोड़ी हैं. सीपीआई (एम) 57 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
त्रिपुरा के चारीलाम विधानसभा सीट पर 12 मार्च को चुनाव होंगे. पश्चिमी त्रिपुरा के सेपाहिजाला जिले की चारीलाम विधानसभा सीट जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है. यहां राज्य के 59 अन्य विधानसभा सीटों के साथ 18 फरवरी को चुनाव होने थे लेकिन, माकपा उम्मीदवार की मौत की वजह से मतदान की तिथि में बदलाव करना पड़ा. सत्तारूढ़ माकपा की तरफ से यहां से रामेन्द्र नारायण देबबर्मा चुनाव लड़ रहे थे. उनका हृदयाघात की वजह से यहां के गोविंदवल्लभ पंत मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 11 फरवरी को निधन हो गया था.
त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले का धनपुर विधानसभा क्षेत्र इस बार के विधानसभा चुनाव में लाल और भगवे झंडे के बीच चुनावी युद्ध भूमि बना हुआ है. यह विधानसभा क्षेत्र बांग्लादेश से लगता हुआ है और यह मुख्यमंत्री माणिक सरकार का घरेलू चुनावी मैदान है. मुख्यमंत्री इस बार चुनाव में लगातार पांचवीं बार यहां से जीत की आशा लगाए हुए हैं. इस बार सरकार की पार्टी माकपा न केवल अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के खिलाफ संघर्ष कर रही है बल्कि तेजी से राज्य में अपनी पकड़ बना रहे बीजेपी के खिलाफ भी संघर्ष कर रही है. भाजपा ने यहां से राज्य महासचिव प्रतिमा भौमिक को अपना उम्मीदवार बनाया है. यह दूसरी बार है जब प्रतिमा सरकार के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं. उन्होंने साल 1998 में यहां से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली थी. कांग्रेस ने यहां पूर्व मंत्री लक्ष्मी नाग को अपना उम्मीदवार बनाया है.

 

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