“भूताे न भविष्यति” प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी

नई दिल्ली। “भूताे न भविष्यति”, प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी काे लेकर देश में कराेड़ाें लाेगाें का नजरिया आज भी यही है। आस्था है। आस्था,आस्था हाेती है। तर्क से परे हाेती है। तथ्याें से काेसाें दूर हाेती है। आस्था ही ताे पत्थर काे भी भगवान बना देती है। आस्थावान काे आस्थावान बना रहने देते हैं और तर्काें के आधार पर आगे बढ़ते हैं। मेन स्ट्रीम मीडिया के एक बहुत बड़े वर्ग और साेशल मीडिया पर सक्रिय समर्थकाें की फाैज ऐसा परसेप्शन बनाने में जुटी पड़ी है कि काेराेना महामारी से लड़ाई में जाे भी अच्छा है उसका पूरा श्रेय केंद्र सरकार व माेदीजी काे मिले और जितनी गड़बड़ी हुई है और हाेगी उसके लिए राज्य ,लाेकल प्रशासन और जनता जिम्मेदार है।

भाजपा का आईटी सेल और साोशल मीडिया पर समर्थक यह मनवाने पर तुले हैं कि यदि प्रधानमंत्री माेदी नहीं हाेते ताे आज देश तबाह हाे गया हाेता। काेराेना से लाखाें मर चुके हाेते। यह एक कल्पना है और कल्पना तर्क से परे हाेती है। सच्चाई यह है कि महज 4 घंटे की नाेटिस पर किए गए लॉक डाउन की देश काे कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है यह घीरे घीरे सामने आ रहा है। इसका अहसास सरकार काे भी है। तभी ताे काेविड 19 के लगातार बढ़ते मामले से बीच लॉक डाउन में लगातार ढील दी जा रही है। तभी ताे प्रधानमंत्री काे कहना पड़ा कि जान भी जहान भी।

वैसे पिछले कुछ दिनाें से दिल्ली की सड़काें पर चल रहे ट्रैफिक काे देख ताे लगता ही नहीं है कि लॉक डाउन है। आज से ट्रेन भी चला दी गई है। कुछ दिनाें बाद हवाई जहाज उड़ाने की भी मंजूरी सरकार देने जा रही है। ऑफिस भी खाेल दिए गए हैं। सरकार माने या न माने लेकिन ट्रेंड बताता है कि काेविड 19 की कम्युनिटी स्प्रेडिंग हाे चुकी है। लगातार बढ़ते मामलाें काे देख कर ताे कुछ ऐसा ही लगता है। उधर लाेगाें काे मीडिया ने यह समझा दिया है कि लॉक डाउन है तभी हंमलाेग बचे हुए हैं। लेकिन विशेषज्ञाें का साफ साफ कहना है कि लॉक डाउन से वायरस न ताे खत्म हाेता है और न ही कम हाेता है। हां,महामारी फैलने की रफ्तार जरूर कम हाे जाती है।

लेकिन अब ताे घीरे घीरे लॉक डाउन हटाने का समय आ रहा है। क्याेंकि देश,राज्य और व्यक्ति सबकी आर्थिक हालत खास्ता हाे चुकी है। काेराेना का संकट यदि गहराता है ताे उसके लिए राज्य सरकारें और जनता काे जिम्मेदार ठहराने का नेरेटिव तैयार किया जाने लगा है। सरकार के नियम और गाइडलाइंस में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। खैर आज प्रधानमंत्री एक बार फिर से काेविड 19 काे लेकर देश काे संबाेधित करने वाले हैं। शायद इस संदेश के साथ लॉक डाउन खत्म करने की घाेषणा हाे जाए या फिर घाेषणा राज्याें पर छाेड़ दिया जाए कि अब हमें काेराेना से साथ ही जीना हाेगा। जीना है ताे काम ताे करना पड़ेगा।

 

(वरिष्ठ पत्रकार संदीप ठाकुर के फेसबुक वाॅल से)

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