नई दिल्ली। धनंजय गिरि नई पीढ़ी के प्रतिनिधि हस्ताक्षर हैं। धनंजय अर्जुन के अन्य नामों में एक नाम है। ये मछली की आंख नही मोदी की आंख देखते हैं। मोदी ही इनके मानक हैं और मोहन इनके मानक। यह अर्जुन भागवत ज्ञान प्राप्त कर देश में भागवत सत्ता की स्थापना करना चाहते हैं। इनके लिए मोहन और मोदी गुरु गोविंद दोनो हैं। अब इनके पास काको लागों पाँव का द्वंद्व भी नही है।
गिरि जी के पास दिशाहीन महत्वाकांक्षा नही हैं। दिशा और दशा को एक साथ साधने की अद्भुत कला इन्होंने विकसित की है। मुँह में शक्कर, पैर में चक्कर, हृदय में आग और मस्तिष्क में बर्फ के कॉकटेल का नाम धनंजय गिरि है। इनका हिंदुत्व सभी राष्ट्रीय विद्रूपता की दवा है। इसी दवा का दावा ये अपनी सद्यः प्रसूत पुस्तक में करते हैं। गोलवलकर पर शोध कर डॉक्टरेट भी इन्होंने हासिल कर ली है। अब ये डॉक्टर धनंजय गिरि के रूप में ख्यात हैं। यह सच है कि इन्होंने लिखने लायक कुछ किया नही पर करने लायक अवश्य ही कुछ दिया है। यह पुस्तक एक प्रमाण भी है और संघ साहित्य का प्रतिमान भी। समकालीन चुनौतियों का वर्तमान हिंदुत्व किस तरह विस्तार प्राप्त करेगा, इसकी बेचैनी इनकी हर बात में दिखती है। ये हिंदुत्व के प्रबल प्रवाह के पक्षधर और प्रवक्ता हैं। इनकी दृष्टि में यांत्रिकता हिंदुत्व के लिए बड़ा संकट है। इसी लिए न हिन्दू पतितो भव की बात करते हैं। इनकी चिंतन की त्रिज्या हिंदुत्व को बड़ी परिधि देगी, ऐसी आस जगाते हैं।
आज डॉक्टर धनंजय का जन्मदिन है। तमाम वैचारिक असहमति के बाद भी इनकी संसादीयता, सादगी, सज्जनता कायल हूं। इनकी मोहब्बत मरकजी बम से ज्यादा मारक है। इनकी मोहब्बत से पुनर्जीवन भी आतंकित हो सकती है। डिस्टेंस कभी भी सोशल नही हो सकता है यह अनसोशल होता है। इमोशनल डिस्टेंस इनके पास नही है। ये जेब और जज्बात की भी दूरियां मिटाते रहते हैं। इनकी थुलथुल देह में कोई ढुलमुल विचार नही पलता। गिरे हुए को उठाना ही गिरिनाम है। देश का जन गिरिजन हो जाय तो गिरिजी के लिए गर्व की बात होगी।
गिरिजी व्यस्त रहें, मस्त रहें, कभी त्रस्त न रहें, इसकी मंगलकामना है।
(बाबा विजेन्द्र के फेसबुक वाॅल से)

