नई दिल्ली। चिरागी दांव से Nitish Kumar बेहाल हैं. परेशानी आगे और भी बढ़ सकती है. संकेत मिल रहे हैं. रामविलास पासवान अब नहीं हैं तो नीतिश जी से पिता के हर बैर का हिसाब लेने को चिराग व्यग्र हैं.लगातार पोलिटिकली करेक्ट एक्ट से चचा Nitish Kumar को लांछित करने में लगे हैं.चिराग का हर दांव मुख्यमंत्री जी पर भारी पड़ता नज़र आ रहा है. चिराग की धधक और धाह में राजनीतिक प्रेक्षक नीतिश के अवसान की आहट सुन रहे हैं.दिल में प्रधानमंत्री को रखने का भाव बीजेपी पर भारी पड़ रहा है. नीतिश के शुभचिंतक तड़फड़ाकर भी इसबार बड़े भाई की मदद नहीं कर पा रहे.
बीच रण में चिराग तो नहीं पर जनता दल यू को हराने LJP की टिकट से लड़ रहे बीजेपी के पुराने खुर्राट नेताओं का भाव सब साफ बयां कर रहा है. राजेंद्र सिंह और रामेश्वर चौरसिया जैसे लोग लगातार संकेत दे रहे हैं किNitish Kumar से बीजेपी को आजाद कराने के लिए ही चिराग के साथ हैं.विनम्रता को हथियार बना प्रहार कर रहे चिराग के लिए बस यही कहना बाकी रह गया है कि चुनाव परिणाम के साथ ही LJP का BJP में विलय कर दिया जाएगा.
UPA को गुडबाय कर NDA
मजबूत नरेटिव गढ़ा जा रहा है कि फ़िल्मी दुनिया में रमे चिराग पिता से इस करार के साथ राजनीति में उतरे थे कि वो UPA को गुडबाय कर NDA के साथ रहेंगे.चिराग की शर्त से 2014 में बात इस हद तक पहुँच गई थी कि लोकजनशक्ति पार्टी का बीजेपी में विलय कर लिया जाए. खैर तब एलजेपी NDA में आकर राजनीतिक कारणों से बचा रह गया.
हनक में कमी आने लगी
LJP के NDA में आने से मुख्यमंत्री Nitish Kumar के हनक में कमी आने लगी. बीजेपी को दबाव में रखने की उनके बड़े भाई वाली नीति शनैः शनैः भेंट चढने लगी. पासवान के कुनबा में आने से परेशान Nitish Kumar ने चुनावी बैतरणी पार करने के लिए 2015 में लालू के साथ जाने का विकल्प आजमाया. बाद में पलटकर बीजेपी के साथ आ गए. बीजेपी के साथ आए Nitish Kumar ने लोकसभा चुनाव में न सिर्फ पासवान के हाजीपुर का टिकट कटवा दिया बल्कि बिहार से राज्यसभा जाने पर भी ग्रहण लगवा दिया.
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गज़ब के समाजवादी थे रामविलास पासवान.लेकिन नीतिश कुमार ने शुतुरमुर्गी चाल ने उन्हें सदा परेशान किए रखा. देवगौड़ा की सरकार में पासवान रेल मंत्री बने. रेल भवन में बिहारियों की एंट्री फ्री कर दी.बिहार जाने वाली ट्रेन प्राथमिकता सूची में आ गई. उससे पहले कर्नाटक के सी के जाफर शरीफ और उससे पहले बंगाल के अब्दुल गनी खान चौधरी की रेल मंत्रालय में चलती थी. पासवान ने पूरे शौर्य से बिहार के राजनीतिज्ञों के लिए रेलवे को सबसे आकर्षक मंत्रालय बना दिया.पासवान ने बिहार के लिए ज्यादा किया या ललित नारायण मिश्रा ने आज भी इसकी तुलना होती है. पासवान ने अपने संसदीय सीट हाजीपुर में रेलवे का जोनल हेडक्वार्टर बना हज़ारों नौकरी बाँट दी.
बाजपेयी के नेतृत्व में NDA की सरकार
तब रेल मंत्रालय का बीट कवर करता था. प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में NDA की सरकार बनी. बिहार के मुख्यमंत्री बनने की चाहत रखने वाले Nitish Kumar ने रेल मंत्रालय मांग लिया. रेल मंत्री बनने के साथ पूर्ववर्ती पासवान को भ्रष्ट और लालची साबित करने की कोशिश में लग गए. उनकी लगातार कोशिश पासवान से बड़े और लायक मंत्री साबित होने की रही.
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