नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पेपर लीक और परीक्षा में धांधली से जुड़े अपराधों पर कठोर दंड का प्रावधान करने वाले प्रारूप विधेयक (ड्राफ्ट बिल) को मंजूरी दे दी।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संसद भवन परिसर में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस विधेयक के मसौदे को स्वीकृति प्रदान की गई। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा संगठित परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
प्रस्तावित कानून में पेपर लीक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और इससे जुड़े अपराधों के लिए अधिकतम 10 वर्ष के कारावास तथा 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किए जाने की जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि यह अब तक का सबसे कठोर कानूनी ढांचा होगा, जिसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम जारी एक वीडियो संदेश में कहा था कि सरकार पेपर लीक की घटनाओं को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने घोषणा की थी कि इस संबंध में कड़े प्रावधानों वाला विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था और फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है।
आंदोलन के बीच सरकार की पहल
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, दोषियों की जवाबदेही तय करने और कथित रूप से NEET-UG पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं।
शुक्रवार को सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी आयोजित हुआ। बैठक के बाद CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है, जबकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर जवाब देने के लिए शनिवार तक का समय मांगा गया है।
दो मांगों पर सकारात्मक संकेत
CJP का दावा है कि सरकार ने सिद्धांततः दो मांगों—आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने तथा प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर और अन्य कानूनी मामलों की समीक्षा—पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, इन दोनों मुद्दों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सरकार और CJP के बीच वार्ता का तीसरा दौर शनिवार को प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह सरकार की ओर से बातचीत का नेतृत्व करेंगे।
अगले सप्ताह संसद में पेश हो सकता है विधेयक
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की तैयारी है। यदि यह कानून पारित हो जाता है तो पेपर लीक, परीक्षा माफिया और संगठित परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों में पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे।
(नोट: प्रस्तावित विधेयक के अंतिम प्रावधान संसद में पेश किए जाने और सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से जारी किए जाने के बाद ही स्पष्ट होंगे।)

