नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफार्म ब्रेनली ने छात्रों के बीच सबसे अधिक प्रचलित और पसंदीदा भाषाओं का पता लगाने के लिए अपने भारतीय यूजर बेस का सर्वेक्षण किया। भारतीय छात्रों में लोकप्रिय विदेशी भाषा (Popular foreign languages considered by Indian students) नाम के इस सर्वे में 3,206 लोग शामिल हुए। साथ ही इसने नेटिव और नॉन-नेटिव भाषाओं की बढ़ती मांग के बारे में गहराई से जानकारी दी।
ब्रेनली के सर्वे में शामिल 86% छात्र अंग्रेजी-माध्यम स्कूल के थे, जबकि केवल 8.5% छात्र हिंदी माध्यम के थे। शेष 5.5% छात्र अन्य भारतीय भाषाओं के माध्यम के छात्र थे। इसके अलावा, ब्रेनली के 53.7% यूजर्स की सेकंडरी भाषा के तौर पर अंग्रेजी दर्ज थी, 35.3% यूजर्स ने हिंदी और 11% यूजर्स ने क्षेत्रीय भाषा को दूसरी भाषा के तौर पर दर्ज कराया। विदेशी भाषाओं के मामले में फ्रेंच को 24.8% स्कूलों में पढ़ाया जाता है, इसके बाद जर्मन (10.7%), स्पेनिश (8.1%), और मैंडरिन (4.1%) का स्थान आता है।
लगभग 72.4% यानी तीन-चौथाई स्कूल इनके अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को भी पढ़ाते हैं। सर्वेक्षण में पता चला है कि 55.5% स्कूलों में तृतीयक भाषा का चयन अनिवार्य था, जिनमें से 46.7% स्कूलों में क्षेत्रीय भाषाएं अनिवार्य थीं। हालांकि, बाकी 44.5% स्कूलों में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं थी। लगभग एक-चौथाई स्कूलों (25.9%) ने विदेशी भाषा चुनने को अनिवार्य किया है।
इस सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि ब्रेनली के यूजर्स में एक अतिरिक्त भाषा सीखने की ललक है। एक विकल्प के तौर पर देखते हुए अधिकांश छात्र या तो एक विदेशी भाषा (36.2%) या एक क्षेत्रीय (35.4%) भाषा स्कूलों में अपनी तृतीयक भाषा के रूप में सीखना चाहते हैं। 28.4% छात्र किसी भी तृतीयक भाषा को पढ़ना नहीं चाहते। मांग के हिसाब से फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, मैंडरिन और अन्य भाषाओं (क्षेत्रीय और विदेशी भाषाओं सहित) की स्थिति क्रमशः 32.1%, 11.7%, 10.9%, 5.6% और 39.7% है।
ब्रेनली के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर राजेश बिसानी ने सर्वेक्षण के नतीजों पर कहा, “आज पूरे भारत में सीखने के माध्यम के रूप में अंग्रेजी और हिंदी को बड़े पैमाने पर स्वीकार किया गया है। हालांकि, पूरे देश में अन्य भाषाओं की भी मांग है। मेरा मानना है कि अगर हम वास्तव में सीखने के लिए अनुकूल माहौल बनाना चाहते हैं तो हमें किसी भी डेमोग्राफी की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। चूंकि, यह बेहतर तरीके से पर्सनलाइजेशन ला सकते हैं, नई पीढ़ी के लर्निंग प्लेटफार्म की जिम्मेदारी हो जाती है कि वे अपनी ऑफरिंग्स को कस्टमाइज करें और इन समूहों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सेवाएं दें।यह शिक्षा को लोकतांत्रिक बनाने में एक लंबा रास्ता तय करने में मदद करेगा। ”
भाषा की विशिष्टता की चुनौती को संबोधित करने के लिए शीर्षस्थ होमवर्क हेल्प प्लेटफार्म ब्रेनली भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में भी सामग्री प्रदान करता है। इसका प्रश्नोत्तर मॉडल अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं से भी शैक्षणिक प्रश्नों को हल करने में मदद करता है। प्लेटफॉर्म ने हाल ही में यूजर बेस में भारी उछाल देखा है। अब दुनियाभर में 350 मिलियन से अधिक यूजर्स इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें भारत के 55 मिलियन से अधिक यूजर शामिल हैं।

