आर्ट ऑफ़ लिविंग की जलतारा परियोजना और भारत में जल संकट

नई दिल्ली।  जलवायु परिवर्तन का असर अब प्रतयक्ष रूप से देखा जाने लगा है. जिसमें पानी की समस्या सबसे ऊपर खड़ी है. यदि समय रहते जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका गया तो लाखों लोग भुखमरी, जल संकट और बाढ़ जैसी आपदाओं के शिकार होंगे जो इंसनों के लिए एक बड़ी चुनौती है. आपको बता दें इस संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. ये भी सच है कि गरीब देश जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. इसके साथ ही सबसे ज्यादा असर ऐसे देशों को पड़ेगा जो जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं. ऐसे में पानी कि संकट से निपटने के लिए कई सरकारी और गैर सरकारी संस्थान इसपर काम करती नजर आ रही है. ऐसे में विश्व प्रसिद्ध मानवतावादी और आध्यात्मिक नेता श्री श्री रविशंकर भी इस कड़ी में तेजी से काम करते नजर आ रहे हैं. आपको बता दें श्री श्री रविशंकर द्वारा अपनी सामाजिक परियोजनाओं के माध्यम से स्थापित आर्ट ऑफ़ लिविंग संगठन का उद्देश्य देश के हर कोने तक पहुँचना और भारत की तीव्र जल सुरक्षा का समाधान प्रदान करना है. ऐसे में एक्वाक्राफ्ट ग्रुप वेंचर्स (एक्वाक्राफ्ट) ने आर्ट ऑफ लिविंग वाटर प्रोजेक्ट (एओएल) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, जिसका उद्देश्य 2030 तक भारत को पानी कमी से छुटकारा दिलाना है.

“जल का जीवन से गहरा संबंध है. पानी के लिए संस्कृत शब्द अपा है और यह शब्द प्रेम का भी प्रतीक है. प्राचीन भारतीय परंपरा में, पहाड़ों, नदियों और पेड़ों को पवित्र माना जाता था और उन्हें सम्मानित किया जाता था. जब हम प्रकृति और स्वयं से अपने संबंध से दूर होने लगते हैं, तभी हम पर्यावरण को प्रदूषित और नष्ट करना शुरू करते हैं. आर्ट ऑफ लिविंग में हम प्रकृति के साथ इस संबंध को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम कर रहे हैं. आर्ट ऑफ़ लिविंग की जलतारा परियोजना भारत में जल संकट को हल करने की दिशा में काम कर रही है.”

 

आर्ट ऑफ लिविंग अपने कई हस्तक्षेपों के माध्यम से भारत को जल सकारात्मक बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहा है. आंकड़ो के मुताबिक संगठन महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में 70 नदियों/धाराओं का कायाकल्प कर रहा है. 19,400 से अधिक गांवों में 34.5 मिलियन से अधिक लोगों को लाभान्वित करने के लिए 64,585 से अधिक रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिससे जल भंडारण क्षमता में 25.02 करोड़ लीटर की वृद्धि हुई है. संगठन ने महाराष्ट्र के जालना जिले के 50 गाँवों में आर्ट ऑफ़ लिविंग जलतारा के तहत 20,000 से अधिक जल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया है. जिससे जल स्तर में 14 फीट की वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप फसल की उपज में 42% की वृद्धि हुई है और किसानों की आय भी दोगुनी से भी अधिक हो गई है. इतना ही नहीं नदी पुनर्जीवन परियोजनाओं के तहत 6.5 लाख से अधिक पेड़ लगाए गए हैं और 2.2 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है.

 

 

एक्वाक्राफ्ट प्रोजेक्ट्स प्रा. लिमिटेड, (www.aquakraft.net) एक्वाक्राफ्ट ग्रुप वेंचर्स की प्रमुख कंपनी है, जिसे जुलाई 2010 में स्थापित किया गया था, जो सभी को स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता प्रदान करने पर केंद्रित सामाजिक उद्यम के लिए एक नवाचार संचालित पीढ़ी है. AquaKraft राजस्व उत्पन्न करने वाले मॉडल विकसित करने और संचालित करने में माहिर है जो जल प्रबंधन और वितरण के साथ-साथ स्वच्छता में एक वैश्विक संकट को हल करने में योगदान देता है. AquaKraft का व्यवसाय मॉडल दो प्रमुख आधारों पर बना है – स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता दुनिया भर के समाजों में महत्वपूर्ण मानवीय आवश्यकताएं और सरकारों के साथ-साथ निजी क्षेत्र को प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित स्थायी और किफायती समाधानों को लागू करने के लिए एक साथ आने की आवश्यकता है. AquaKraft का डिजिटल इनोवेशन, AqVerium – दुनिया का पहला डिजिटल वाटर बैंक (www.aqverium.com), AOL द्वारा शुरू की गई सभी कायाकल्प परियोजनाओं पर काम करेगा और उनमें से प्रत्येक के लिए एक डिजिटल जल बचत बैंक खाता खोलेगा. इस अवसर पर बोलते हुए, एक्वाक्राफ्ट ग्रुप वेंचर्स के संस्थापक अध्यक्ष और सीईओ डॉ. सुब्रमण्य कुसनूर ने कहा, “हम इस साझेदारी से धन्य हैं और विनम्रतापूर्वक श्री श्री रविशंकर को आभार व्यक्त करना चाहते हैं.

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