नई दिल्ली। बड़ी अजीब बात है कि यदि श्रीमती सोनिया गांधी कर्नाटक में कांग्रेस के लिये चुनाव प्रचार करने जाती हैं तो हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर में यह डरी हुई कांग्रेस का कदम है कि जो नेता प्रचार के लिये नही आ रहे थे , उनको प्रचार में झोंक दिया ! वे कहते हैं कि जो चुनाव प्रचार से दूर थीं , उन्हीं सोनिया गांधी को प्रचार में उतार दिया ! यह प्रधानमंत्री की अपनी सोच है , अपना तरीका है हमला बोलने का । अब देखिये न कि चुनाव प्रचार में कह रहे हैं कि यदि वे प्रतिदिन किलो दो किलो गालियां न खा लें तो दिन अच्छा सा नहीं लगता और उन्होंने गालियां भी गिन रखी हैं -अब तक 91 गालियां दी जा चुकी हैं ! क्या यह चुनाव का कोई मुद्दा हो सकता है ? क्या यह कर्नाटक की कोई बड़ी समस्या है ? प्रियंका गांधी कहती हैं कि यदि हम प्रधानमंत्री जी द्वारा अपने परिवार को दी गयी गालियां बताने लगें तो पूरी किताब लिखी जा सकती है लेकिन हम मुद्दों की बात करेंगे न कि व्यक्तिगत आक्षेप लगाने की ! कर्नाटक में बजरंग दल पर बैन लगाने को कितनी खूबसूरती के साथ बजरंग बली के साथ जोड़कर चुनाव प्रचार आगे बढ़ाया! यह होती है इवेंट मैनेजमेंट ! इसी कहते हैं मौके पर चौका ! नहले पे दहला ! कांग्रेस को भी सोच समझ कर इसे मुद्दा बनाना चाहिए था ।
-कमलेश भारतीय

