वेव सिटी के आसपास अब धरना—प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे किसान संघर्ष समिति के लोग

गाजियाबाद। देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी बनने जा रही वेव सिटी के विकास कार्यों को अब किसान संघर्ष समिति के लोग बाधा नहीं पहुंचा सकेंगे। कार्यपालक मजिस्ट्रेट/पुलिस उपायुक्त ग्रामीण जोन गाजियाबाद की ओर से लिखित में आदेश जारी किया गया है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 के तहत अब किसान संघर्ष समिति द्वारा किसी प्रकार का धरना—प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। हालांकि किसान संघर्ष समिति की ओर से भी न्यायालय में इस मामले की सुनवाई की जा रही है। वहीं गाजियाबाद के ​कमिश्नर जे.रविंद्र. गौड़ ने धरना—प्रदर्शन पर रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि थाना वेव सिटी स्थित वेवसिटी हाईटेक टाउनशिप में स्थित कंपनी के सेल्स आफिस की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर 17 मार्च 2025 से किसान संघर्ष समिति द्वारा अपनी मांगों को लेकर धरना—प्रदर्शन जारी है। धरने पर बैठे प्रर्दशनकारियों की ओर से बल्ली तथा पाल लगाकर धरना देते हुए मार्ग को अवरुद्ध कर दिया गया है। कार्यपालक मजिस्ट्रेट/पुलिस उपायुक्त ग्रामीण जोन गाजियाबाद की ओर से जारी आदेश के मुताबिक इस प्रकरण में बीएनएसएस की धारा 126/135 के तहत प्रशासन की ओर से कार्यवाही अमल में लाई जा चुकी है। वहीं सिविल न्यायालय गाजियाबाद द्वारा भी 22 मार्च 2017 को जारी आदेश में कंपनी के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करने के लिए कहा है। उसके बावजूद भी किसान संघर्ष समिति की ओर से धरना—प्रदर्शन किया जाना सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना में आता है।

कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने किया आदेश जारी

धरना—प्रदर्शन होने से जहां वेव सिटी द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों में बाधा पहुंच रही है वहीं स्थानीय लोगों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रकरण में वेव सिटी थाना ओर से भी विवेचना की गई तो उसमें पाया गया कि उसमें कहा गया कि विवाद की विषय वस्तु बॉंस, बल्ली एवं पाल को हटा लिया जाए। इसके लिए किसान संघर्ष समिति को भी अदालत ने अपना पक्ष रखने का समय दिया है। सबसे रोचक तथ्य यह है कि वेव सिटी डवलपर कंपनी और किसान संघर्ष समिति के बीच जो समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ था। उन शर्तो को भी समिति के लोग नहीं मान रहे हैं और धरना—प्रदर्शन करके न्यायालय की अवमानना कर रहे हैं।

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