
नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली, वार्ड-111, बापरोला के हरफूल विहार और जय विहार की गलियों में इन दिनों हल्की बारिश के बाद ही जलजमाव की गंभीर समस्या सामने आ रही है। अधूरी सड़कों और अवरुद्ध नालियों ने इस वार्ड के निवासियों की परेशान बढ़ा दी है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि बरसात के मौसम से पहले ही सड़कें कीचड़ और पानी से लबालब हो जाती हैं। जगह—जगह कचरों का अंबार और कई गलियों में अंधेरे लोगों को डरा रही है। जनता है कि केवल अपना दु:ख ही हर कहीं बयान करती नजर आती है, लेकिन कोई उनकी सुनने वाला नहीं।
बता दूं कि विशेष रूप से 10 नंबर गली, जो हरफूल विहार नाले को कॉलोनी से जोड़ती है और बजरंग चौक तक जाती है, बुरी तरह से प्रभावित है। यह सड़क रोजना ऑफिस जाने वाले यात्रियों और रिक्शा चालकों के लिए मुख्य मार्ग है, लेकिन अब इसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां चलना तक मुश्किल हो गया है। कीचड़ और गड्ढों की वजह से रिक्शा पलटने की घटनाएं आम हो गई हैं, जिससे यात्रियों को चोटें भी आ रही हैं। पिछली सरकार ने इस सड़क के निर्माण की शुरुआत तो की थी, लेकिन नई सरकार बनने के बाद से काम अधूरा ही पड़ा है। क्षेत्रवासी अब भी अधूरी सड़कों के पूरे होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यही सड़क आगे गांव से निकलते मुख्य सड़क की ओर जाती है, जो आज भी अधूरी है। पूरी सड़क नहीं बनने से वाहनों को उधर भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
भीमा गार्डन से जी ब्लॉक की ओर जाने वाली सड़क की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। हल्की बारिश में भी यहां जलभराव हो जाता है। छठ घाट रोड से होते हुए सीधी एफ एवं जी ब्लॉक की ओर जाने वाली सड़क ट्रांस्फार्मर के आगे काफी दिनों से नहीं बन पाया है। वहां भी बरसात में जल जमाव एवं कीचड़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। दास गार्डेन की मुख्य सड़क जो सीधी बापरोला गांव की ओर जाती है, वहां भी निर्माण कार्य सुस्त है। यहां की ऐसी कई सड़कें हैं, जो अव्यवस्थित होने से यहां की जनता को बहुत दु:ख देती है।
सामाजिक संस्था पंचकोसी के अध्यक्ष सुशील देव ने बताया कि यहां की कई गलियों की हालत इतनी जर्जर है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। कई नालियां या तो पूरी तरह से बंद हैं या पहले से ही कचरे से भरी हुई हैं। यदि समय रहते इनकी सफाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और बदतर हो सकती है। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिनका समय पर निस्तारण नहीं हो रहा। स्ट्रीट लाइटें महीनों से खराब पड़ी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। कहीं—कहीं सीवर और पीने के पानी को लेकर भी शिकायतें मिल रहीं, लेकिन उनकी किसी भी समस्या का समाधान नहीं दिखाई देता। यहां की जनता में जन प्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर बड़ा असंतोष भरा है, जो काफी चिंताजनक है।
ज्ञात हो कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा हाल ही में इस बावत बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय आरडब्लूए का कहना है कि सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक का अधिकार हैं और सरकार को इन पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए। स्थानीय निवासी एसके मंडल ने भी चिंता जताते हुए कहा कि बरसात के मौसम में उनके घर के सामने वाली गली में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे मक्खी-मच्छरों के साथ-साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। यहाँ तक कि उनके घर की नींव तक प्रभावित हो रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि जब तक स्थायी समाधान संभव न हो, तब तक कम से कम मलवा डालकर जलभराव की समस्या से कुछ राहत दिलाई जाए। यदि समय रहते जरूरी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले मानसून में यहां की स्थिति नारकीय हो सकती है। जनता उम्मीद कर रही है कि सरकार और प्रशासन जल्द ही ज़मीनी स्तर पर काम शुरू करेगा और उन्हें इस दयनीय स्थिति से निजात दिलाएगा।

