रेखा गुप्ता ने किया ‘मुख्यमंत्री जनसेवा सदन’ का वैदिक विधि से उद्घाटन, कहा — “जनसेवा ही मेरा धर्म, यही मेरी पहचान”

नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने मंगलवार को राजधानी के लोगों को समर्पित ‘मुख्यमंत्री जनसेवा सदन’ का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ जनकल्याण के इस नए अध्याय की शुरुआत की।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा, “आज ‘मुख्यमंत्री जनसेवा सदन’ का शुभारंभ वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न हुआ। माँ भारती और समस्त दिल्लीवासियों के कल्याण की भावना से, पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और संकल्प के साथ पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।”

“जनसेवा ही मेरा धर्म, दिल्ली का कल्याण मेरी प्राथमिकता”

रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में भावुकता और प्रतिबद्धता के साथ कहा, “इस पावन अवसर पर मैंने यह संकल्प पुनः दोहराया कि जनसेवा ही मेरे जीवन का धर्म है और दिल्ली की जनता का कल्याण ही मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता।” उन्होंने बताया कि यह सदन केवल एक भवन नहीं, बल्कि दिल्ली की आत्मा की आवाज़ होगा —
“यह दिल्ली के प्रत्येक नागरिक की चिंता, आशा, सुझाव और समाधान का केंद्र बनेगा। हर गली, हर मोहल्ले, हर वर्ग और हर व्यक्ति की बात अब सीधे सरकार तक पहुँचेगी- यहीं से, इसी सदन से।”

जनभागीदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का केंद्र

मुख्यमंत्री ने इसे जनता की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बताते हुए कहा, “यह भवन जनभागीदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की उस परंपरा का विस्तार है, जिसकी नींव जनता के विश्वास से बनी है।”

जनता से किया भावनात्मक आग्रह

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी दिल्लीवासियों से अपील की कि इस सदन को सेवा, समाधान और समर्पण का प्रतीक बनाया जाए।
“यहाँ से उठी हर आवाज़ को उत्तर मिले, हर शिकायत को समाधान, और हर नागरिक को सम्मान प्राप्त हो।”

“हर दिल्लीवाले के साथ, हर संघर्ष के बीच”

अपने संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने कहा, “आइए, इस नयी जनसेवा यात्रा में हम सभी एक साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। हर उम्मीद के साथ, हर संघर्ष के बीच, हर दिल्लीवाले के साथ। यही हमारा संकल्प है, यही हमारी पहचान है।”

मुख्यमंत्री जनसेवा सदन का उद्घाटन दिल्ली के प्रशासनिक इतिहास में जनसंपर्क और सहभागिता की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे सिर्फ एक सरकारी केंद्र नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच संवाद का पुल बताया है, जिससे लोकतंत्र और मजबूत होगा।

 

 

 

 

 

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