तेजू (अरुणाचल प्रदेश)। अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने तेजू स्थित धार्जीलिंग तिब्बती बस्ती में परम पावन 14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस समारोह में भाग लिया। इस पावन अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं, गणमान्य व्यक्तियों और तिब्बती समुदाय के सदस्यों ने भाग लेकर आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और श्रद्धांजलियों से वातावरण को भावुक कर दिया। कार्यक्रम का आयोजन ल्हागोन जांगछुप चोएलिंग मठ में हुआ।
उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने प्रमुख भिक्षु डजोचेन गनोर रिनपोछे के साथ मिलकर परम पावन के दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “दलाई लामा केवल तिब्बती समुदाय के लिए आध्यात्मिक नेता नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति, करुणा और सहिष्णुता के प्रतीक हैं। उनका जीवन और संदेश सीमाओं से परे जाकर मानवता को सच्चे अर्थों में जोड़ता है।”
उन्होंने दलाई लामा द्वारा संस्थागत रूप से दलाई लामा परंपरा को जारी रखने की घोषणा को ऐतिहासिक और हिमालयी क्षेत्र की जनता, विशेष रूप से अरुणाचलवासियों के लिए अत्यंत स्वागत योग्य कदम बताया। “यह निर्णय तिब्बती संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान को आने वाली पीढ़ियों तक बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है,” उन्होंने कहा।
चौना मीन ने भारत में बसे तिब्बती समुदाय के संघर्ष, धैर्य और सांस्कृतिक गौरव की सराहना करते हुए कहा, “मैं इस बात की गहरी प्रशंसा करता हूं कि तिब्बती समुदाय ने अपनी भाषा, पोशाक और आध्यात्मिक परंपराओं को सहेज कर रखा है। यह हमें यह सिखाता है कि कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न हों, अपनी विरासत को गर्व के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।”
उन्होंने स्थानीय भाषाओं और लिपियों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा, “जब कोई भाषा मरती है, तो एक पूरी संस्कृति खो जाती है।” उन्होंने समुदायों से तिब्बती समुदाय से प्रेरणा लेने और अपनी भाषायी विरासत को सहेजने का आग्रह किया।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस वर्ष 31 मार्च से 5 अप्रैल तक ‘फ्रीडम ट्रेल’ नामक एक ऐतिहासिक ट्रैकिंग अभियान आयोजित किया गया था, जो उस मार्ग पर आधारित था जिस पर से परम पावन तिब्बत से भारत आए थे। उन्होंने बताया कि सरकार इस ऐतिहासिक मार्ग को सांस्कृतिक पर्यटन के रूप में विकसित कर रही है, जिसमें ट्रेकिंग रूट और सांस्कृतिक उत्सव को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों का उपयोग कर स्वदेशी ग्रंथों की खोज और संरक्षण में लगी है, जिनमें ताई-खामती लिपि में लिखे रामायण और महाभारत के संस्करण शामिल हैं।
इस समारोह में मंत्री वांगकी लोवांग, पासांग दोरजी सोना, विधायक डॉ. मोहेष चाई, चाउ जिंगनु नामचूम, मुत्चू मिती, आईजीपी (ईस्टर्न रेंज) पी.एन. ख्रीमई, लोहित और नामसाई के डीसी और एसपी, तथा कई विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

