नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष से वापसी पर उन्हें और देश को बधाई दी है। पीएम मोदी ने मंगलवार को एक ट्वीट करते हुए लिखा:
“मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूँ, क्योंकि वह अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौट रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में उन्होंने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है। यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन – गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।”
शुभांशु शुक्ला 18 दिन के AX-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा पूरी कर 15 जुलाई 2025 को धरती पर लौटे। वे ISS का दौरा करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं, जिससे भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन कार्यक्रम को नई गति मिली है।
प्रधानमंत्री के इस संदेश ने न केवल शुभांशु के अभूतपूर्व योगदान को सम्मानित किया, बल्कि देश की अंतरिक्ष विज्ञान यात्रा में एक नया उत्साह भी भर दिया है। यह मिशन भारत के आगामी गगनयान मिशन 2027 के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है।
भारतीय समयानुसार 15 जुलाई 2025 को दोपहर 3:00 बजे भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा का समापन हुआ। वह ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में सुरक्षित रूप से धरती पर लौट आए। शुभांशु, अमेरिका की एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित AX-4 मिशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) गए थे और वह ISS पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं।
यह मिशन मूलतः 14 दिनों का निर्धारित था, लेकिन कुछ तकनीकी आवश्यकताओं के चलते इसे 18 दिन तक बढ़ा दिया गया। इस दौरान शुभांशु व उनके तीन अंतरिक्ष यात्री साथियों ने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें से 7 प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा प्रस्तावित थे।
माइक्रोएल्गी प्रयोग: शुभांशु ने अंतरिक्ष में ऐसे जैविक सैंपल पर काम किया जो भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भोजन, ऑक्सीजन और बायोफ्यूल का स्रोत बन सकते हैं।
मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक अध्ययन: एक अध्ययन में यह जांचा गया कि अंतरिक्ष यात्री कैसे शून्य गुरुत्वाकर्षण के वातावरण में मानसिक रूप से समायोजन करते हैं।
मस्तिष्क में रक्त प्रवाह पर अध्ययन: इस प्रयोग से अंतरिक्ष यात्रियों के साथ-साथ पृथ्वी पर रोगियों के इलाज में मदद मिलने की संभावना है।
शुभांशु शुक्ला 263 किलोग्राम वैज्ञानिक सामग्री और डेटा के साथ लौटे हैं। ड्रैगन यान 580 पाउंड (करीब 263 किलो) से अधिक वजन के सामान और सभी चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर धरती पर उतरा।
यह मिशन भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गगनयान मिशन 2027 में लॉन्च होने की तैयारी में है। शुभांशु के अनुभव और डेटा से भारतीय मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को महत्वपूर्ण दिशा मिलेगी। मिशन की कुल लागत लगभग ₹550 करोड़ बताई जा रही है।

