मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा और केंद्र सरकार की विकास यात्रा मिलकर बिहार और पूरे देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी 

मधुबनी। भाजपा प्रवक्ता डॉ. धनंजय गिरि ने मधुबनी प्रवास के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस मौके पर उन्होंने जीएसटी सुधार और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर विस्तार से चर्चा की। एक अहम कदम यह है कि दिसंबर 2025 तक जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की स्थापना की जाएगी। इससे लंबे समय से व्यवसाय जगत जिन जटिलताओं और देरी से जूझ रहा था, उसका समाधान मिलेगा। यह न्याय, पारदर्शिता और त्वरित निपटारे की दिशा में बड़ा कदम है।

महिला उद्यमियों के संदर्भ में भी ये सुधार दूरगामी महत्व रखते हैं। सरल जीएसटी ढांचा और आसान क्रेडिट पहुँच महिला-नेतृत्व वाले एमएसएमई को विस्तार, नवाचार और रोजगार सृजन के नए अवसर देगा। यह प्रधानमंत्री मोदी की सोच “नारी शक्ति भारत की प्रगति की चालक है” का ही मूर्त रूप है।

भाजपा नेता डॉ. धनंजय गिरि ने कहा, “आज मुझे जगत जननी माता सीता की पावन धरती को नमन करने का अवसर मिला। मिथिला की प्रमुख नगरी मधुबनी में परंपरा और विकास को लेकर संवाद करने का मौका मिला। मिथिला वासियों के आत्मीय स्वागत से मैं अभिभूत हूँ।”

उन्होंने आगे कहा कि जब पूरी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ मंदी की गिरफ्त में हैं, तब भारत 7.8 प्रतिशत की विकास दर से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। यह केवल कर सुधार नहीं, बल्कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

एक सवाल के जवाब में भाजपा नेता डॉ. धनंजय गिरि ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि 3 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में हुई 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए फैसले देश की अर्थव्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा और केंद्र सरकार की विकास यात्रा मिलकर बिहार और पूरे देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के कामों की प्रशंसा करते हुए डॉ धनंजय गिरि ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को कर-मुक्त करना और जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी को शून्य करना, आम आदमी की पीड़ा के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह कदम न केवल आर्थिक राहत देता है, बल्कि नागरिकों को संकट की घड़ी में गरिमा भी प्रदान करता है। भारत की रीढ़ – किसान – को केंद्र में रखते हुए ट्रैक्टर, सिंचाई प्रणाली, उर्वरक और कीटनाशकों पर कर घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे खेती की लागत घटेगी और ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा मिलेगी। गृहिणियों और परिवारों को भी राहत मिली है। साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, साइकिल, रेफ्रिजरेटर, टीवी और वॉशिंग मशीन जैसे घरेलू सामान सस्ते होने से घर-घर में आराम और सुविधा बढ़ेगी। युवाओं की आकांक्षाओं का भी सम्मान किया गया है। छोटी कारों और मोटरसाइकिलों पर जीएसटी में कटौती उन्हें पहली बार खरीदारों के लिए किफायती बनाती है। इससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की राह खुलती है।

बुनियादी ढांचा निर्माण, जो मोदी सरकार की प्राथमिकता है, को सीमेंट पर कर 28% से घटाकर 18% कर देने से नई गति मिलेगी। इससे घरों की लागत कम होगी और बड़े प्रोजेक्ट्स तेज़ी से पूरे होंगे। एमएसएमई, जो भारत में रोजगार की सबसे बड़ी रीढ़ है, को सरलीकृत अनुपालन और तेज़ रिफंड से बल मिला है। लंबे समय तक उपेक्षित इस वर्ग को अब नवाचार और विस्तार की नई संभावनाएं मिल रही हैं। स्पष्ट है कि यह सुधार केवल कर ढांचे का बदलाव नहीं है। यह उस “नए भारत” की नींव है, जहां हर वर्ग – गरीब, किसान, महिला, युवा और उद्यमी – राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में भागीदार है।

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