नई दिल्ली : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हाल ही में आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) के दौरान JNUSU के अध्यक्ष और Left-leaning समूहों द्वारा विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का लगातार उल्लंघन किया गया। छात्रों और निर्वाचित काउंसलरों ने कई अवसरों पर विरोध जताया, लेकिन उनकी आवाज को नजरअंदाज किया गया।
14 अक्टूबर को स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ (SIS) की GBM में बैठक के दौरान भारी अराजकता और व्यवधान देखा गया। JNUSU अध्यक्ष ने अपनी मनमानी करते हुए बैठक को अचानक स्थगित कर दिया। इस दौरान सामान्य छात्रों और निर्वाचित काउंसलरों ने इस प्रक्रिया का विरोध किया, लेकिन उनकी आपत्तियों को अनसुना कर दिया गया। 17 अक्टूबर को वही समूह बिना किसी नोटिफिकेशन और क्वोरम के GBM को पुनः बुलाकर EC सदस्यों की एकतरफा नियुक्ति कर दी।
15 अक्टूबर को स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज़ (SSS) की GBM लगभग 17 घंटे चली, लेकिन किसी प्रकार का लोकतांत्रिक निर्णय नहीं लिया गया। 17 अक्टूबर को GBM को अचानक पुनः शुरू किया गया और वामपंथी प्रतिनिधियों ने EC सदस्यों को सीधे नियुक्त करना शुरू किया, जबकि सामान्य छात्रों और निर्वाचित काउंसलरों ने विरोध जताया। विरोध के बावजूद Left समूह ने छात्रों को नजरअंदाज करते हुए EC सदस्यों की एकतरफा घोषणा कर दी।
16 अक्टूबर को स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर एंड कल्चर स्टडीज़ (SLL&CS) की GBM में EC की नियुक्ति केवल पांच मिनट में पूरी कर दी गई। इस दौरान भी सामान्य छात्रों और निर्वाचित काउंसलरों ने विरोध किया, लेकिन इसे अनसुना किया गया और EC सदस्यों की एकतरफा घोषणा कर दी गई। इस प्रक्रिया में Left गुट की हिंसा और गुनाह भी देखने को मिली, जिसमें छात्रों पर दबाव और धमकियां शामिल थीं।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि JNUSU का अध्यक्ष अपनी मनमानी चला रहा है और Left समूह लगातार हिंसा के माध्यम से लोकतंत्र को दबा रहा है। सामान्य छात्रों और निर्वाचित काउंसलरों द्वारा विरोध किया गया, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया। इस प्रकार की गतिविधियां JNUSU की नियमावली और विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ हैं।
वैभव मीणा, संयुक्त सचिव, JNUSU: “इस तरह की गलत और गैर‑लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया हम कतई स्वीकार नहीं करेंगे। हमने और निर्वाचित काउंसलरों ने बार‑बार आवाज उठाई, मगर हमारी शिकायतों को अनसुना किया गया। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ही हस्तक्षेप कर इस प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमबद्ध तरीके से नहीं ठहराता, तो हम शांतिपूर्ण और संगठित तौर पर व्यापक विरोध और आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य केवल यही है कि चुनाव शुद्ध रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से हों और छात्रों के अधिकारों का संरक्षण हो, इसके लिए हम हर संभव कदम उठाएंगे।”
प्रवीण पियूष, सचिव, ABVP जेएनयू: “JNUSU अध्यक्ष और Left गुट द्वारा की जा रही मनमानी और हिंसक नियुक्तियां छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधे उल्लंघन हैं। निर्वाचित काउंसलरों और आम छात्रों के विरोध को बार-बार नजरअंदाज किया गया। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि EC चुनाव केवल पारदर्शी और नियमबद्ध GBM के माध्यम से ही होने चाहिए। यदि प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता है, तो हम छात्रों और जेएनयू लोकतंत्र की रक्षा के लिए कड़ा कदम उठाएंगे।”
मयंक पंचाल, अध्यक्ष, ABVP जेएनयू: “इस तरह की गैर-लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं कैंपस में अव्यवस्था और आक्रोश पैदा कर रही हैं। प्रशासन यदि अब भी ध्यान नहीं देता है, तो आम छात्रों में नाराजगी बढ़ सकती है और स्थिति गंभीर हो सकती है। हम जोर देकर कहते हैं कि जेएनयू में छात्रों की भागीदारी और लोकतंत्र को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।”

