सीतामढ़ी में श्रीराम-जानकी मंदिर का होगा भव्य जीर्णोद्धार, 25 अप्रैल को भूमि पूजन करेंगे सम्राट चौधरी

सीतामढ़ी। मां जानकी की पावन जन्मभूमि सीतामढ़ी के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण नजदीक आ गया है। लगभग 834 वर्ष पुराने प्रसिद्ध श्रीराम-जानकी मंदिर के जीर्णोद्धार और संरक्षण का मार्ग अब प्रशस्त हो गया है।

देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए संकल्पित रामायण रिसर्च काउंसिल इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ा रहा है। मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ ही करीब 12 एकड़ क्षेत्र में एक दिव्य शक्तिपीठ और “श्री जानकी शोध संस्थान” की स्थापना भी की जाएगी।

परियोजना के पहले चरण में 25 अप्रैल, जानकी नवमी के पावन अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा विधिवत भूमि पूजन और शिलान्यास किया जाएगा। इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं।

दूसरे चरण में 12 एकड़ परिसर में 51 शक्तिपीठों से ज्योति लाकर “महाशक्ति ज्योति” की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों के प्रमुख मंदिरों से पवित्र मिट्टी और जल भी लाया जाएगा। मध्यप्रदेश के नलखेड़ा स्थित माता बगलामुखी सिद्धपीठ से विशेष ज्योति लाकर माता सीता को श्रीभगवती स्वरूप में स्थापित करने की योजना है।

उल्लेखनीय है कि अयोध्या के भव्य राम मंदिर के वास्तुकार सोमपुरा परिवार ने भी वर्ष 2022 में सीतामढ़ी पहुंचकर निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। इस परियोजना के तहत इंडोनेशिया, बाली और अशोक वाटिका जैसे धार्मिक स्थलों से भी मिट्टी और जल लाने की योजना है, जिससे मंदिर परिसर का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ेगा।

इससे पहले चंद्रशेखर मिश्र, कुमार सुशांत, स्वामी विरेंद्रानंद, आचार्य संतोष पांडेय और रविकांत गर्ग सहित कई धार्मिक और सामाजिक हस्तियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया है।

इस परियोजना के पूरा होने से न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि सीतामढ़ी को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान भी प्राप्त होगी।

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