शक्ति संपन्न और शील संपन्न राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर भारत

 

कृष्णमोहन झा

विगत विगत दिनों नागपुर में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत में विश्व गुरु बनकर सारी दुनिया का मार्गदर्शन करने की सामर्थ्य को रेखांकित करते हुए कहा कि इसमें किसी को भी संशय नहीं होना चाहिए । भारत का विश्व गुरु बनना तय है। संघ प्रमुख ने इसी संदर्भ में राम मंदिर निर्माण आंदोलन उदाहरण देते हुए कहा कि उस आंदोलन की सफलता को लेकर भी तीस साल तक दुविधा बनी रही । लोग मुझसे पूछते थे कि कैसे होगा तो मैं कह देता था कि होगा लेकिन कैसे होगा वो मुझे पता नहीं। मैं कहता कि भाऊ साहब देवरस ने कहा है 20 -30 साल में होगा। अगर 30 साल में नहीं हुआ तो उसके बाद पूछना। उसके पहले मत पूछो। मैंने एक भरोसा मन में पैदा कर लिया था और फिर 2010 में बीस साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णय आया फिर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया। इससे यह पता चलता है कि जो अनिवार्य है वह होकर रहता है।संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में स्थित डा आबाजी छत्ते सेवा एवं अनुसंधान के जमठा क्षेत्र में विश्व के पहले भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज दुनिया जिस दौर से गुजर रही है उसमें भारत का विचार और रास्ता ही एकमात्र विकल्प है। हमें बस अपना कर्तव्य निभाते हुए एक कदम आगे बढाते रहना है। भारत को वैश्विक मार्ग दर्शक के रूप में स्थापित होते देखने का सौभाग्य इसी पीढ़ी को प्राप्त होगा। निरंतर प्रयासों और सामूहिक अनुशासन के बल पर भारत अपने इस सपने को साकार करेगा।इस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, के साथ ही श्री जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज,स्वामी गोविन्द देव गिरि महाराजसाध्वी ऋतंभरा दीदी, योगगुरु बाबा रामदेव सहित अनेक धर्माचार्य एवं संत विशेष रूप से उपस्थित थे।जामठा में बनने जा रहे इस अनूठे भारत दुर्गा मंदिर में देवी दुर्गा की 18 भुजाओं वाली 14 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस मंदिर को देश की 52 वीं शक्ति पीठ माना जा रहा है जहां देवी दुर्गा के रूप में भारत माता की पूजा अर्चना की जाएगी।
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत को भारत की पूजा करना है तो भारत बनना होगा, भारत को जानना पडेगा और भारत को मानना पड़ेगा।भारत को समझने के लिए इसे इसकी सभ्यता और सनातन दृष्टि से देखने की आवश्यकता है।भागवत ने मन और बुद्धि पर चढे पश्चिमी सोच के आवरण को त्याग कर साहस और आत्म निर्भरता के मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि जब हम इन मूल्यों को दैनिक आचरण का हिस्सा बनाएंगे तभी एक मजबूत राष्ट्र के रूप में उभर कर भारत पूरी दुनिया का मार्ग दर्शन करने में सक्षम होगा।संघ प्रमुख ने कहा कि भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि शक्ति के बिना कुछ नहीं होता है। सत्य को भी शक्ति का सहारा लेकर दुनिया में प्रतिष्ठित करना पड़ता है। भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ सत्य को सत्य के मूल में ग्रहण करते हैं।
संघ प्रमुख ने कहा कि मंदिर‌ बन गया तो उसकी व्यवस्था भी बन जाएगी। मंदिर में रोज विधिवत् पूजा अर्चना भी होने लगेगी और हम सब लोग भी यहाँ आते रहेंगे लेकिन भारत दुर्गा की पूजा केवल मंदिर के पुजारी और व्यवस्थापक ही करें यह पर्याप्त नहीं है। वह पूजा हम सबको करनी पडे़गी। भारत को दुर्गा की पूजा करना है उसे भारत बनना पडेगा। भारत को भारत की पूजा करनी है तो उसे भारत बनना पडे़गा, भारत को जानना पडे़गा,भारत को मानना पड़ेगा। हमको निर्भय बनना पडे़गा।अभी देखेंगे तो पता नहीं चलता कि भारत विश्व गुरु होने वाला है लेकिन इसमें दुविधा नहीं होना चाहिए। अभी जो स्थिति है उसमें दुनिया ने भारत का रास्ता नहीं लिया तो कोई भविष्य है क्या। जो अनिवार्य है उसके बारे में शंका नहीं होना चाहिए। बस हमें एक एक कदम आगे बढाना है। संतों के मुख से जो घोषणा हुई है भारत विश्व गुरु बनेगा। भारत का जो जो खो गया है वह सब वापस आ जाएगा। भारत शक्ति संपन्न और शील संपन्न राष्ट्र बनेगा

(लेखक राजनैतिक विश्लेषक है)

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