नई दिल्ली: मुंहासे, पिगमेंटेशन, बाल झड़ना और समय से पहले त्वचा पर उम्र का असर जैसी समस्याओं को अक्सर केवल बाहरी त्वचा संबंधी परेशानी माना जाता है। लेकिन अब चिकित्सा जगत में यह धारणा तेजी से मजबूत हो रही है कि ऐसी समस्याएं शरीर के भीतर मौजूद मेटाबॉलिक और हार्मोनल असंतुलन का संकेत भी हो सकती हैं।
फंक्शनल और एस्थेटिक मेडिसिन विशेषज्ञ Dr. Anoop Bhagat भारत में ऐसे चिकित्सकों में शामिल हैं जो लक्षण आधारित डर्मेटोलॉजी की जगह “रूट-कॉज” यानी मूल कारण पर आधारित उपचार पद्धति को बढ़ावा दे रहे हैं।
तीन दशक से अधिक के क्लिनिकल अनुभव वाले डॉ. भगत का मानना है कि केवल त्वचा की ऊपरी सतह का इलाज करने से अस्थायी राहत मिलती है, जबकि शरीर के अंदर मौजूद हार्मोनल, मेटाबॉलिक या सूजन संबंधी कारणों का उपचार करने से परिणाम अधिक प्रभावी और लंबे समय तक टिकाऊ होते हैं।
नई दिल्ली स्थित Meeabolic Cosmoderm Center में डॉ. भगत कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजी को मेटाबॉलिक और फंक्शनल डायग्नोस्टिक्स के साथ जोड़कर उपचार करते हैं। यहां क्रॉनिक एक्ने, ऑटोइम्यून स्किन डिजीज और बिना स्पष्ट कारण के होने वाले हेयर फॉल जैसी समस्याओं का इलाज आंतरिक स्वास्थ्य मूल्यांकन और आधुनिक एस्थेटिक प्रक्रियाओं के संयोजन से किया जाता है।
डॉ. भगत के अनुसार, “कई त्वचा संबंधी समस्याएं केवल त्वचा तक सीमित नहीं होतीं। जब हम शरीर के भीतर मौजूद असंतुलन को ठीक करते हैं, तब परिणाम सिर्फ दिखाई नहीं देते बल्कि लंबे समय तक बने रहते हैं।”
उनकी उपचार पद्धति में मेटाबॉलिक मार्कर्स और जीवनशैली का विश्लेषण, त्वचा संबंधी समस्याओं को गट हेल्थ और सूजन से जोड़कर समझना, तथा लेजर और एंटी-एजिंग जैसी प्रक्रियाओं को आंतरिक सुधार के साथ जोड़ना शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी भारत में अब स्वास्थ्य सेवाओं का फोकस तेजी से प्रिवेंटिव, पर्सनलाइज्ड और इंटीग्रेटेड मेडिसिन की ओर बढ़ रहा है। इसी बदलाव के बीच त्वचा को केवल बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि शरीर के आंतरिक स्वास्थ्य का आईना माना जाने लगा है।

