भारत-वियतनाम के बीच एविएशन कनेक्टिविटी को नई उड़ान, वियतजेट ने किए रणनीतिक समझौते

नई दिल्ली। वियतनाम की अग्रणी एयरलाइन वियतजेट (VietJet) ने भारत और वियतनाम के बीच विमानन, बुनियादी ढांचे और तकनीकी कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने भारत की प्रमुख कंपनियों जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड और बर्ड ग्रुप के साथ रणनीतिक सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
इन समझौतों पर हस्ताक्षर भारत-वियतनाम बिजनेस फोरम के दौरान हुए, जिसका आयोजन वियतनाम के महासचिव और राष्ट्रपति टो लाम की भारत यात्रा के अवसर पर किया गया।
यह सहयोग समझौता भारत और वियतनाम के बीच विमानन, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी का मार्ग प्रशस्त करेगा। साथ ही यह दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और जन-से-जन संपर्क को नई मजबूती देगा।
समझौते के तहत, वियतजेट और जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड संयुक्त रूप से एयर कनेक्टिविटी, एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, एविएशन सेवाओं, स्मार्ट एयरपोर्ट्स और दीर्घकालिक निवेश संभावनाओं पर काम करेंगे।
वहीं, बर्ड ग्रुप के साथ साझेदारी के तहत ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं, प्रशिक्षण, एविएशन टेक्नोलॉजी, ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सेवाएं और उत्कृष्ट यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है।
वियतजेट के प्रथम उपाध्यक्ष दिन्ह वियत फुओंग ने कहा,
“भारत और वियतनाम तेज विकास और रणनीतिक सहयोग के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। हमें विश्वास है कि भारतीय कंपनियों के साथ हमारी साझेदारी एविएशन, व्यापार, तकनीक और निवेश के नए गलियारे खोलेगी, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के गतिशील विकास में योगदान देगी।”
विगत वर्षों में वियतजेट ने भारत और वियतनाम के बीच संपर्क बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। एयरलाइन ने भारत के प्रमुख आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्रों जैसे नई दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद और बेंगलुरु को वियतनाम से जोड़ने वाला व्यापक उड़ान नेटवर्क विकसित किया है।
अब तक वियतजेट 25 रूट्स पर लगभग 80 साप्ताहिक उड़ानों का संचालन कर चुकी है और दोनों देशों के बीच 25 लाख से अधिक यात्रियों को सेवाएं दे चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इन रणनीतिक साझेदारियों के जरिए वियतजेट सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापार और आर्थिक सहयोग के मजबूत पुल के रूप में अपनी भूमिका को और सशक्त करेगी। इससे न केवल भारत-वियतनाम संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी, बल्कि दक्षिण एशिया और वैश्विक विमानन परिदृश्य में वियतनाम की उपस्थिति भी और मजबूत होगी।

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