देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 आखिरकार विवादों के ऐसे भंवर में फंस गई, जिसने करोड़ों अभिभावकों और लाखों छात्रों की उम्मीदों को झकझोर कर रख दिया। महाराष्ट्र के नासिक से शुरू हुई पेपर लीक की आशंका कुछ ही दिनों में राष्ट्रीय संकट बन गई। सोशल मीडिया पर परीक्षा से पहले वायरल हुए “गेस पेपर” और प्रश्नों के कथित मिलान ने छात्रों के बीच अविश्वास पैदा कर दिया। मामला बढ़ता गया, प्रदर्शन तेज हुए और अंततः केंद्र सरकार को परीक्षा निरस्त करने का बड़ा फैसला लेना पड़ा। अब पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है।
सूत्रों के अनुसार नासिक में सबसे पहले कुछ कोचिंग नेटवर्क और संदिग्ध टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते सवाल वायरल होने की सूचना मिली थी। परीक्षा खत्म होने के बाद जब छात्रों ने प्रश्नों का मिलान किया तो कई सवाल हूबहू सामने आने का दावा किया गया। इसके बाद बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में भी पेपर लीक की चर्चाएं तेज हो गईं। जांच एजेंसियों ने शुरुआती कार्रवाई में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया, जबकि कुछ को गिरफ्तार भी किया गया है। पुलिस को मोबाइल चैट, डिजिटल दस्तावेज और लेनदेन से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।
विवाद बढ़ने के साथ ही देशभर में छात्रों का आक्रोश भी खुलकर सामने आया। दिल्ली, पटना, जयपुर, लखनऊ और प्रयागराज समेत कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किए। अभ्यर्थियों का कहना था कि महीनों की मेहनत पर पेपर माफिया ने पानी फेर दिया। सोशल मीडिया पर “ReNEET” और “Justice for Students” जैसे अभियान ट्रेंड करने लगे। कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए और NTA की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए। संसद से लेकर सड़क तक सरकार से जवाब मांगा गया कि आखिर इतनी बड़ी परीक्षा की गोपनीयता कैसे भंग हो गई। शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रहे पेपर लीक को लेकर सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल उठे। बढ़ते राजनीतिक दबाव और छात्रों के उग्र विरोध के बीच केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई। इसके बाद NTA ने आधिकारिक रूप से NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की।
सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक का नेटवर्क किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच के दायरे में कोचिंग संस्थान, साइबर गिरोह और कुछ परीक्षा केंद्र भी बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि डिजिटल ट्रेल और बैंक लेनदेन की गहन जांच की जा रही है। कई संदिग्ध मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की निगरानी भी शुरू कर दी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। NEET जैसी परीक्षा, जिसे देश के लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर देते हैं, उसी पर भरोसे का संकट खड़ा हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों ने दिन-रात मेहनत की, लेकिन पेपर माफिया और सिस्टम की लापरवाही ने उनका मनोबल तोड़ दिया।
हालांकि सरकार और NTA ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि दोबारा परीक्षा पूरी पारदर्शिता और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई जाएगी। छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा और नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है— क्या देश की सबसे अहम प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर माफिया के शिकंजे से मुक्त हो पाएंगी, या हर बार युवाओं के सपने इसी तरह दांव पर लगते रहेंगे?

