नई दिल्ली। कुछ वर्ष पहले तक वियतनाम भारतीय यात्रियों के लिए एक उभरता हुआ पर्यटन स्थल माना जाता था, लेकिन आज स्थिति तेजी से बदल चुकी है। अब भारत के विभिन्न हवाई अड्डों पर हो ची मिन्ह सिटी, हनोई, दा नांग और फु क्वोक के लिए वियतजेट की उड़ानों में सवार भारतीय परिवारों को देखना आम बात हो गई है।
भारतीय ट्रैवल फोरम और ऑनलाइन कम्युनिटी में वियतजेट को अक्सर “भारतीय यात्रियों को सबसे बेहतर समझने वाली वियतनामी एयरलाइन” के रूप में देखा जा रहा है। यात्रियों का कहना है कि विमान में कदम रखते ही उन्हें अपनापन महसूस होता है। मुस्कुराते हुए केबिन क्रू, भारतीय स्वाद वाले भोजन और कई बार भारतीय सांस्कृतिक झलकियां यात्रियों के अनुभव को खास बनाती हैं।
मुंबई की यात्री प्रिया शर्मा बताती हैं,
“अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान बुजुर्ग परिवारजनों के साथ सफर को लेकर मुझे चिंता रहती थी, लेकिन वियतजेट की उड़ान में हिंदी सुनाई दी और करी, नान व मसाला चाय जैसे भोजन विकल्प मिले। इससे हमें घर जैसा अहसास हुआ।”
कई यात्रियों ने यह भी बताया कि वियतजेट की कई उड़ानों में भारतीय पायलट और केबिन क्रू मौजूद रहते हैं, जिससे यात्रा और अधिक सहज महसूस होती है। कई अवसरों पर एयरलाइन ने दीवाली और होली जैसे भारतीय त्योहारों को संगीत, पारंपरिक परिधानों और विशेष गतिविधियों के साथ उड़ानों में मनाकर यात्रियों को विशेष अनुभव दिया है।
नई दिल्ली के एक यात्री ने ऑनलाइन मंच पर लिखा,
“यह सिर्फ एक उड़ान नहीं, बल्कि स्वागत और अपनत्व का एहसास है।”
भारत-वियतनाम कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा नेटवर्क
वर्ष 2025 के आंकड़े इस बढ़ते ट्रैफिक की पुष्टि करते हैं। उस वर्ष लाखों भारतीय पर्यटकों ने वियतनाम की यात्रा की, और वियतजेट ने दोनों देशों के बीच सबसे बड़े उड़ान नेटवर्क का संचालन किया।
वर्तमान में एयरलाइन भारत के 11 शहरों को वियतनाम के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाले 25 रूट्स पर लगभग 80 साप्ताहिक उड़ानें संचालित कर रही है। अब तक 25 लाख से अधिक यात्री वियतजेट के जरिए भारत और वियतनाम के बीच यात्रा कर चुके हैं।
इन आंकड़ों से न केवल बढ़ती यात्रा मांग का पता चलता है, बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों की भी झलक मिलती है।
भारतीय यात्रियों के लिए वियतनाम हुआ और करीब
यात्रियों का कहना है कि वियतजेट की सीधी उड़ानों ने नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे भारतीय शहरों को वियतनाम के प्रमुख गंतव्यों से जोड़कर यात्रा को आसान, तेज और सुलभ बना दिया है।
बेंगलुरु के उद्यमी राजीव मेहता कहते हैं,
“वियतजेट केवल शहरों को नहीं, बल्कि लोगों और संस्कृतियों को जोड़ रहा है।”
भारतीय संस्कृति की समझ बनी सफलता की कुंजी
वियतजेट की इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे एयरलाइन की चेयरवुमन डॉ. गुयेन थी फुओंग थाओ की भारतीय संस्कृति के प्रति समझ और जुड़ाव को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उन्होंने वर्षों में नई दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु और बोधगया की यात्राएं की हैं। इन यात्राओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करना भी रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय संस्कृति के प्रति यह सम्मान एयरलाइन की सेवाओं और उत्पादों में साफ दिखाई देता है, जो भारतीय यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए हैं।
आसमान से आगे बढ़ता सहयोग
भारत और वियतनाम के बीच सहयोग केवल हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं है। नोई बाई एयरपोर्ट पर वियतजेट की ग्राउंड सर्विस इकाई AirportNEO फिलहाल एयर इंडिया को सेवाएं प्रदान कर रही है और इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
इसके अलावा एयरलाइन “स्टार्टअप फ्लाइट” जैसी पहल के माध्यम से भारत और वियतनाम के इनोवेशन इकोसिस्टम को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
सिर्फ किफायती विकल्प नहीं, एक मजबूत सेतु
कई भारतीय यात्रियों के लिए वियतजेट अब केवल एक लो-कॉस्ट एयरलाइन नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत और वियतनाम के बीच यात्रा को सामान्य, सहज और सांस्कृतिक रूप से करीब लाने वाला एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह कनेक्टिविटी दोनों देशों के बीच पर्यटन, व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

