कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनियमितताओं के कई आरोप लगाए। करीब सत्तावन मिनट के अपने भाषण में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का मंत्र केवल “सबका साथ, सबका विकास” नहीं बल्कि “सबका हिसाब” भी होगा। उन्होंने दावा किया कि जनता ने तृणमूल कांग्रेस को सबक सिखाया है और अब पिछली सरकार के दौरान हुए हर भ्रष्टाचार की जांच की जाएगी।
विधानसभा में बोलते हुए शुभेन्दु अधिकारी ने दावा किया कि बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट के नाम पर करोड़ों रुपये निजी संस्था फिक्की को हस्तांतरित किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और इन मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने लक्ष्मीर भंडार, वृद्धावस्था पेंशन, मनरेगा, छात्रवृत्ति योजनाओं और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता के धन के उपयोग की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अधिकारी ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
अपने भाषण में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी निशाना साधा और विभिन्न आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने बीरभूम की पत्थर खदानों से होने वाले राजस्व को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि पिछली व्यवस्था में राजस्व संग्रह में भारी गड़बड़ियां थीं।
शुभेन्दु अधिकारी ने अपने राजनीतिक संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान उन्हें कई बार अदालत का सहारा लेना पड़ा और लोकतांत्रिक गतिविधियों के आयोजन में प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने नंदीग्राम चुनाव का उल्लेख करते हुए तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व पर भी राजनीतिक टिप्पणी की।
इस बीच, राज्य सरकार के एक फैसले को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में इस्कॉन की भागीदारी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस्कॉन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि विद्यार्थियों को संतुलित और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें सोया, दाल, पनीर, राजमा और अन्य प्रोटीन स्रोत शामिल होंगे।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बच्चों के पोषण से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा और विशेषज्ञों की राय ली जानी चाहिए। उनका तर्क है कि भोजन संबंधी नीतियां स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में आगामी राजनीतिक समीकरणों और विकास के मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव आगे भी जारी रह सकता है। भ्रष्टाचार, कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता, निवेश और रोजगार जैसे मुद्दे आने वाले समय में राज्य की राजनीति के केंद्र में रहने की संभावना है।

