हंगामे के बीच लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पास, दोषियों को अब 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी; पेपर लीक माफिया, एजेंसियों और दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली: लोकसभा में भारी हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी गई। यह विधेयक लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में और कड़े प्रावधान जोड़ने के उद्देश्य से लाया गया है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

विधेयक पारित होने के बाद कांग्रेस सांसदों के नारेबाजी के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।


NEET पेपर लीक मामले में सरकार ने की त्वरित कार्रवाई: जितेंद्र सिंह

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि NEET प्रश्नपत्र लीक मामले में सरकार ने तत्काल कदम उठाए और 12 जुलाई को जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

उन्होंने बताया कि 28 जुलाई को इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि नए संशोधन कानून के लागू होने के बाद ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में होगी और करीब पांच महीने के भीतर निर्णय आने की उम्मीद है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए वर्ष 2024 में कानून बनाया गया था, लेकिन हाल की घटनाओं से सामने आई कमियों को देखते हुए सरकार ने इसमें और कठोर प्रावधान जोड़ने का फैसला किया है।


विपक्ष के आरोपों पर जितेंद्र सिंह का पलटवार

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी।

गौरव गोगोई के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों से जुड़े मामलों में पूरी संवेदनशीलता और संयम के साथ कार्रवाई की। उन्होंने असम छात्र आंदोलन (1979-1984) का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस सरकार के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में कई लोगों की जान गई थी।

वहीं, प्रियंका गांधी द्वारा प्रश्नपत्र लीक से जुड़े आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन आंकड़ों का स्रोत स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 के कानून के लागू होने के बाद ऐसे मामलों में 52 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं।


2026 संशोधन विधेयक में किए गए बड़े बदलाव

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है।

नए संशोधन के तहत दोषियों, सेवा प्रदाता एजेंसियों और पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सजा के प्रावधानों को और कठोर किया गया है।

व्यक्तिगत दोषियों पर बढ़ी सख्ती

  • जेल की सजा: 3-5 साल से बढ़ाकर 5-10 साल
  • जुर्माना: ₹10 लाख तक से बढ़ाकर ₹50 लाख तक

सर्विस प्रोवाइडर और एजेंसियों पर कार्रवाई

  • जुर्माना: ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ तक
  • ब्लैकलिस्टिंग अवधि: 4 साल से बढ़ाकर 8 साल

पेपर लीक माफिया पर कड़ा शिकंजा

  • जेल की सजा: 5-10 साल से बढ़ाकर 7-10 साल
  • जुर्माना: ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ तक

फास्ट ट्रैक अदालतों में होगी सुनवाई, जांच की समय सीमा तय

संशोधन विधेयक में पेपर लीक मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का प्रावधान किया गया है।

इसके तहत:

  • केंद्रीय एजेंसी या विशेष जांच दल को जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
  • दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर लगाया चर्चा भटकाने का आरोप

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे पेपर लीक रोकने वाले विधेयक पर चर्चा से ध्यान हटाने के लिए अन्य मुद्दे उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में अधिक व्यस्त रहा, जबकि यह विधेयक देश के लाखों छात्रों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।

सरकार ने कहा कि यह संशोधन प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी संगठित धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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