JSSC CGL रद्द होने से 1975 चयनित कर्मियों की नौकरी पर संकट, भारी बारिश में सचिवालय गेट पर प्रदर्शन

रांची। झारखंड में JSSC CGL 2023 की नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद चयनित अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के सामने अचानक नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा सोमवार को नियुक्ति रद्द करने का आदेश जारी किए जाने के अगले ही दिन मंगलवार को 1975 चयनित कर्मियों को सचिवालय के प्रोजेक्ट भवन में प्रवेश करने से रोक दिया गया।

कल तक जो कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन में ASO, CI और LDC जैसे पदों पर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे, मंगलवार को वही कर्मचारी भारी बारिश के बीच सचिवालय के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर खड़े नजर आए।

बिना लिखित नोटिस प्रवेश रोकने का आरोप

प्रदर्शन कर रहे प्रभावित कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें काम पर नहीं आने या सेवा समाप्त किए जाने संबंधी कोई लिखित नोटिस नहीं दिया गया है। इसके बावजूद सचिवालय के मुख्य द्वार पर तैनात पुलिसकर्मी उन्हें अंदर प्रवेश करने से रोक रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि नियुक्ति रद्द करने से पहले सरकार को उन्हें स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी और विधिवत सूचना दी जानी चाहिए थी।

भारी बारिश के बीच सचिवालय गेट पर प्रदर्शन

मंगलवार को बड़ी संख्या में प्रभावित कर्मचारी भारी बारिश के बावजूद प्रोजेक्ट भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर जुटे रहे। उन्होंने सरकार से अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे अपने पदों पर काम कर रहे थे। ऐसे में अचानक एक आदेश के बाद नौकरी समाप्त होने से उनके सामने गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट पैदा हो गया है।

सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग

प्रभावित कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि नौकरी समाप्त करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और पूरे मामले में स्पष्ट स्थिति सामने रखी जाए। उनका कहना है कि यदि नियुक्ति रद्द करने का निर्णय लिया गया है तो इसकी कानूनी और प्रशासनिक स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

वहीं, सचिवालय परिसर में प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

एक आदेश के बाद बदली 1975 लोगों की स्थिति

JSSC CGL 2023 की नियुक्ति में कुल 1975 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद अब इन सभी कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

फिलहाल प्रभावित कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। सचिवालय के बाहर जारी प्रदर्शन और कर्मचारियों की मांगों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

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