पीएम गतिशक्ति को मिलेगी नई रफ्तार, छत्तीसगढ़ सरकार ने किए दो अहम एमओयू

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में पीएम गतिशक्ति पहल को और मजबूत करने के लिए जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स डेटा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों से राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और विकास कार्यों को अधिक डेटा-आधारित और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

ये एमओयू भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बीआईएसएजी-एन) और नेशनल लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (एनएलडीएसएल) के साथ किए गए हैं। दोनों समझौतों पर 20 अगस्त को रायपुर में आयोजित पीएम गतिशक्ति और LEADS 2025 डिसेमिनेशन वर्कशॉप के दौरान हस्ताक्षर हुए।

वर्कशॉप का आयोजन छत्तीसगढ़ सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग और भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने संयुक्त रूप से किया था।

डेटा आधारित विकास को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पीएम गतिशक्ति छत्तीसगढ़ में डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत कर रही है। इसके माध्यम से राज्य को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना बनाने, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कमियों की पहचान करने तथा औद्योगिक विकास में बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य में निवेश और टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए मजबूत आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

35 से अधिक विभाग पीएम गतिशक्ति से जुड़े

वर्कशॉप में छत्तीसगढ़ की पीएम गतिशक्ति के क्षेत्र में प्रगति को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। राज्य में 35 से अधिक विभागों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा 41 महत्वपूर्ण और 600 से अधिक अतिरिक्त डेटा लेयर्स को मैप किया गया है।

राज्य ने पीएम गतिशक्ति के तहत 45 यूज केस और 30 टूल्स विकसित किए हैं। इससे यह प्लेटफॉर्म केवल डिजिटल डेटा का संग्रह न रहकर वास्तविक इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास योजना तैयार करने का उपयोगी माध्यम बन रहा है।

सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम में GIS की मदद

पीएम गतिशक्ति के तहत GIS आधारित रोड ब्लैक स्पॉट की पहचान की जा रही है। इसके आधार पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिल रही है, जिससे सड़क हादसों को कम करने और लोगों की जान बचाने की दिशा में प्रभावी काम किया जा सकता है।

इसी तरह डेटा आधारित तकनीक का उपयोग उन गांवों की पहचान के लिए भी किया जा रहा है, जहां बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच पर्याप्त नहीं है। एमएमजीबीवाई के तहत बस रूट को बेहतर बनाने में भी इस डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

80 से अधिक परियोजनाओं को मिली मदद

राज्य के वार्षिक एक्शन प्लान के तहत 80 से अधिक परियोजनाओं को सहायता दी गई है। पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए करीब 600 मोबाइल टावर लगाए गए हैं। वहीं, ‘भव्य’ योजना के तहत नवा रायपुर में 700 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।

LEADS 2025 में छत्तीसगढ़ का बेहतर प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ पीएम गतिशक्ति को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले प्रमुख राज्यों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। DPIIT के LEADS 2025 आकलन में भी राज्य को भूमि से घिरे राज्यों की श्रेणी में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल किया गया है।

पीएम गतिशक्ति का इस्तेमाल केवल सड़क, रेल या औद्योगिक परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग का ‘गज संकेत’ ऐप भी इसका एक उदाहरण है।

यह ऐप प्रशासनिक सीमाओं के बजाय समस्या की वास्तविक भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने में मदद करता है। इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

दो नए एमओयू के साथ छत्तीसगढ़ में जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स डेटा और डिजिटल प्लानिंग के इस्तेमाल को और विस्तार मिलने की उम्मीद है। इससे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को अधिक समन्वित, तेज और डेटा-आधारित बनाने में मदद मिलेगी।

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