थिम्फू/अहमदाबाद। भारत की प्रमुख निजी बिजली उत्पादक कंपनी अडानी पावर और भूटान की सरकारी बिजली उत्पादन कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (DGPC) ने 770 मेगावाट की चामखारचू-I जलविद्युत परियोजना स्थापित करने के लिए शेयरधारक समझौते (SHA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भूटान में भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समझौते पर हस्ताक्षर समारोह में भूटान के प्रधानमंत्री ल्योनचेन दाशो शेरिंग तोबगे मौजूद रहे। कार्यक्रम में भूटान के वित्त मंत्री और ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री के साथ ड्रुक होल्डिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (DHI), भूटान पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPC), DGPC के बोर्ड एवं प्रबंधन तथा अडानी पावर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
यह दोनों कंपनियों के बीच दूसरी बड़ी जलविद्युत साझेदारी है। इससे पहले सितंबर 2025 में 570 मेगावाट की वांगचू जलविद्युत परियोजना के लिए समझौता किया गया था। यह परियोजना मई 2025 में अडानी समूह और DGPC के बीच हुए 5,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाओं के विकास संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) का भी हिस्सा है।
49:51 की हिस्सेदारी में होगा विकास
चामखारचू-I परियोजना भूटान के मध्य क्षेत्र के झेमगांग जिले में चामखारचू नदी पर विकसित की जाएगी। यह एक पीकिंग रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना होगी और इसे Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।
परियोजना में अडानी पावर और DGPC की इक्विटी हिस्सेदारी क्रमशः 49:51 होगी। परियोजना के वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख (COD) से 30 वर्षों की रियायत अवधि होगी। निर्माण कार्य 2027 की पहली छमाही में शुरू होने की उम्मीद है, जबकि परियोजना को निर्माण शुरू होने के करीब छह वर्षों के भीतर चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
सर्दियों में भूटान की बिजली जरूरत होगी पूरी
अडानी पावर के प्रबंध निदेशक अनिल सरदाना ने कहा कि चामखारचू जलविद्युत परियोजना के माध्यम से भूटान सरकार और DGPC के साथ साझेदारी को मजबूत करने पर कंपनी को खुशी है। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में ऊर्जा संक्रमण को गति देने में जलविद्युत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता कम करने और साझा सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में योगदान देगी।
उन्होंने कहा कि परियोजना से भूटान की सर्दियों में बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी, जबकि गर्मियों के महीनों में अतिरिक्त हरित बिजली को भारत निर्यात किया जा सकेगा। इससे दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक और ऊर्जा मूल्य तैयार होगा।
DGPC के प्रबंध निदेशक दाशो छेवांग रिनजिन ने कहा कि यह साझेदारी भूटान के जलविद्युत विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है और भूटान-भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि 770 मेगावाट की यह परियोजना विशेष रूप से सर्दियों में भूटान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा को भारत निर्यात करने के अवसर पैदा करेगी।
5,000 मेगावाट कार्यक्रम के तहत आगे भी परियोजनाओं पर नजर
दोनों संस्थाएं व्यापक 5,000 मेगावाट जलविद्युत विकास कार्यक्रम के तहत अतिरिक्त जलविद्युत परियोजनाओं की संभावनाओं का सक्रिय रूप से मूल्यांकन कर रही हैं। चामखारचू-I परियोजना को भारत और भूटान के बीच नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने तथा क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम परियोजना माना जा रहा है।

