पुरी (ओडिशा)। प्रयागराज में इस वर्ष आयोजित महाकुंभ मेले में विशाल सेवा कार्य के बाद, अदाणी समूह ने अब अपनी सेवा यात्रा को ओडिशा के पुरी रथ यात्रा तक विस्तार दे दिया है। भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा के दौरान अदाणी समूह श्रद्धालुओं और प्रशासनिक कर्मियों के लिए सेवा कार्य कर रहा है, जो 26 जून से 8 जुलाई 2025 तक चलेगी।
“सेवा ही साधना है”: गौतम अदाणी की प्रेरणा से प्रेरित
अदाणी समूह के चेयरमैन श्री गौतम अदाणी की यह भावना कि “सेवा ही साधना है”, इस प्रयास की मूल भावना है। रथ यात्रा के दौरान समूह केवल प्रायोजक नहीं, बल्कि “सेवक” की भूमिका निभा रहा है। यह सेवा प्रयास अदाणी फाउंडेशन, पुरी जिला प्रशासन, इस्कॉन और स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से संचालित हो रहा है।
क्या-क्या किया जा रहा है सेवा के तहत?
4 मिलियन (40 लाख) से अधिक मुफ्त भोजन और पेय पदार्थ वितरित किए जाएंगे।
नि:शुल्क भोजन काउंटर स्थापित किए गए हैं, जो श्रद्धालुओं और अधिकारियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।
ठंडे पेय काउंटर शहरभर में लगाए गए हैं ताकि ओडिशा की गर्मी में राहत मिल सके।
पुरी बीच लाइफगार्ड महासंघ को सहायता, ताकि समुद्रतट पर सुरक्षा बनी रहे।
बीच सफाई में स्वयंसेवकों की मदद, विशेषकर प्लास्टिक कचरे को हटाने में।
स्वयंसेवकों को मुफ्त टी-शर्ट, नगरकर्मियों को फ्लोरोसेंट सुरक्षा जैकेट।
अधिकारियों व श्रद्धालुओं के लिए जैकेट, रेनकोट, कैप और छाते भी वितरित किए जा रहे हैं।
सेवा का बदलता दृष्टिकोण: परंपरा और आधुनिकता का संगम
अदाणी समूह के सेवा मॉडल की खास बात यह है कि यह कार्य न तो केवल प्रतीकात्मक है और न ही आउटसोर्स किया गया है। अधिकांश योजना महीनों पहले से स्थानीय साझेदारों और अदाणी समूह के समर्पित स्वयंसेवकों द्वारा की जाती है। संचालन की जिम्मेदारी भी वही लोग निभाते हैं जिनका समुदाय से गहरा संबंध होता है।
इससे पहले प्रयागराज में 45 दिनों तक चले महाकुंभ मेले के दौरान भी अदाणी समूह ने इस्कॉन और गीता प्रेस के साथ मिलकर लाखों श्रद्धालुओं के लिए भोजन वितरण और कल्याण सेवाओं में भागीदारी निभाई थी। स्वयं गौतम अदाणी ने 21 जनवरी को कुंभ मेले में सेवा में भाग लिया था।
पुरी रथ यात्रा: जनसंख्या भले कम, ऊर्जा उतनी ही तीव्र
जहां महाकुंभ सेवा का उदाहरण “विस्तार” था, वहीं पुरी रथ यात्रा “निकटता और समर्पण” का प्रतीक बन गई है। अदाणी समूह का यह प्रयास केवल सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के विकास को संस्कृति, समुदाय और करुणा से जोड़ने की एक सशक्त परिकल्पना है।
निष्कर्षतः, यह सेवा प्रयास न केवल श्रद्धालुओं की सहायता है, बल्कि एक आदर्श भी प्रस्तुत करता है कि कैसे आधुनिक भारतीय कॉरपोरेट संस्थाएं आध्यात्मिक भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकती हैं — निष्ठा, संवेदना और समर्पण के साथ।

