“सत्य, धैर्य और आत्मसम्मान से बढ़कर कुछ नहीं”—सीता का संदेश सदैव स्मरणीय

नई दिल्ली: जानकी नवमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में वैदेही फाउंडेशन द्वारा ग्यारहवां वार्षिक आयोजन ‘ग्यारहवां जानकी प्राकट्योत्सव 2026’ वैशाख शुक्ल नवमी के दिन राजेन्द्र भवन …

वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच का वार्षिकोत्सव समारोह संपन्न

  नई दिल्ली। हिन्दी साहित्य को समर्पित संस्था “वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच” द्वारा देश विदेश में साहित्य की अविरल धारा बहाने हेतु काव्य गोष्ठियों का ऑफ़लाइन तथा ऑनलाइन अनवरत क्रम …

काशी में विक्रमोत्सव: संस्कृति के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का पुनर्जागरण

कृष्णमोहन झा भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र यदि किसी नगर को कहा जाए तो वह निस्संदेह काशी है। ऐसी पवित्र और ऐतिहासिक नगरी में जब सम्राट विक्रमादित्य की परंपरा …

मज़हब, मानवता और वैचारिक संघर्ष का विमर्श: ‘मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना’

भारतीय समाज में धर्म, मज़हब और मानवता के संबंधों को लेकर सदियों से विचार-विमर्श चलता रहा है, किंतु समकालीन समय में यह बहस और अधिक तीव्र और प्रासंगिक हो गई है। इसी …

उपराष्ट्रपति ने सांसद श्रीमती सुधा मूर्ति द्वारा लिखित पुस्तक ‘टाइड्स ऑफ टाइम: भारत’स हिस्ट्री थ्रू मुरल्सट इन पार्लियामेंट’ का विमोचन किया

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के संविधान सदन में लोकसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित और राज्यसभा सांसद श्रीमती सुधा मूर्ति द्वारा लिखित …

विख्यात इतिहासकार डॉ सय्यद मुबीन ज़ेहरा को रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की प्रकाशन सलाहकार समिति की सदस्य नामित किया गया

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज के इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सय्यद मुबीन ज़ेहरा को उत्तर प्रदेश की 18वीं शताब्दी की विश्व प्रसिद्ध रामपुर …

मिथिला में राम खेलथि होरी…. मिथिला में….

सुधीर कुमार पुरातन काल से ही मिथिला सांस्कृतिक रूप से बहुत ही समृद्ध और सुसंस्कृत रहा है। खान-पान, विध-व्यवहार, धर्म-संस्कृति, भाषा आदि वर्षों से समृद्ध रहा है। यहां प्रत्येक पर्व …

आनंदमठ उपन्यास ने देशवासियों में राष्ट्रभाव पुष्ट किया

नई दिल्ली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा शुक्रवार को प्रवासी भवन, नई दिल्ली में बंकिमचंद्र चटर्जी कृत आनंदमठ उपन्यास पर गोष्ठी आयोजित की गई। इस गोष्ठी की अध्यक्षता इंद्रप्रस्थ साहित्य …

सत्य, न्याय, नीति और मातृशक्ति की सुरक्षा शिवाजी के हिंदवी स्वराज की मूल अवधारणा : दीपक विस्पुते

इंदौर। सत्य, न्याय, नीति और मातृशक्ति की सुरक्षा ही छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज की मूल अवधारणा रही है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक …

आध्यात्म, समाज और संवेदना का समन्वय: ‘अन्तर्ध्वनि’ ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली। समकालीन हिंदी काव्य-जगत में एक सार्थक और मूल्यपरक हस्तक्षेप के रूप में अन्तर्ध्वनि का प्रकाशन उल्लेखनीय है। डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित यह कृति प्रख्यात शिक्षिका एवं साहित्यकार …