हिसार। छोरियां छोरों से कम नहीं होती फिल्म की हीरोइन रश्मि सोमवंशी का कहना है कि इस फिल्म की नायिका बिन्नी जैसे संघर्ष और हालात कुछ कुछ मेरे भी रहे हैं । इसलिए यह कैरेक्टर मेरे दिल के बहुत करीब है । रश्मि सोमवंशी फिल्म की प्रमोशन के लिए हिसार , रेवाडी और सिरसा आई थीं और अपने फिल्मी सफर के बारे में बात कर रही थीं ।
– पहली फिल्म कौन सी रही ?
– जी कुत्ता सै । मेरी पहली फिल्म है ।
– कैसे मिली यह फिल्म ?
– किसी ने बताता कि ऑडिशन हो रहे हैं और मैं ऑडिशॅ देने चली गयी । यह मेरी जिंदगी का पहला ही ऑडिशन था और मैं परभहंस क्रिएशंज में काम कर रही थी । यह फिल्म मुझे मिल गयी ।
– छोरियां छोरों से कम नहीं होतीं में हरियाणवी कैसे बोल पाईं ?
– डायरेक्टर राजेश बब्बर हरियाणा से ही हैं । खूब मेहनत करवाई हरियाणवी के लिए । मैं कैमरे पर सीन देने के बाद भी हरियाणवी ही बोलती रही । इसी तरह मैंने हरियाणवी महिलाओं की वाडी लैंग्वेज भी गौर से देखी और उसे अपनाने की , उसमें रमने की कोशिश की ताकि हरियाणवी लगूं । डायरी में सब नोट करती रहती थी ।
– हीरो अनिरूद्ध दवे के साथ कैसी ट्यूनिंग रही ?
– बहुत बढिया । हम फिल्म की तरह फिल्म से अलग भी अच्छे दोस्त हैं और वह मेरी बहुत मदद करता है ।
-प्रिय कलाकार कौन ? कौन सी हीरोइन दिल के करीब है ?
– वहीदा रहमान । उनके विविध चरित्र हैं जो मुझे लुभाते हैं ।
– अब परिवार को पता चल गया कि कैमरे के पीछे नहीं बल्कि सामने भी है । अब क्या कहते हैं ?
– मेरी मां सदैव मुझे स्पोर्ट करती रही । अब सभी स्पोर्ट कर रहे हैं । पिता तो आईएएस बनाना का सपना देखते थे ।
– किसके साथ काम करने की इच्छा है ?
– इरफान खान के साथ काम करने का सपना है और वह भी पूरा करूंगी । बहुत अमेजिंग हैं इरफान ।
– हरियाणा का माहौल कैसा लगा ?
– बहुत प्यारा । किसी ने परेशान नहीं किया शूटिंग के दौरान और हिसार में तो फिल्म के शो के बाद सेल्फी व ऑटोग्राफ लेने वालों का तांता लग गया । बार बार हरियाणा आना चाहूंगी ।
मूल रूप से यूपी के प्रतापगढ की निवासी रश्मि राजपूत वंशी परिवार से है । जब पांचवीं कक्षा में थीं तब पापा की ट्रांस्फर नोएडा हो गयी और वहीं मास कम्युनिकेशन की पढाई की । हालांकि परिवार को यह कोर्स ही बडा अजीब लगा । एमईटी यूनिवर्सिटी से यह कोर्स किया पर पापा मुझे आईएएस देखना चाहते थे । फिर मुम्बई की राह पकडी और बालाजी टेली फिलम्ज में एकता कपूर की एसिस्टेंट डायरेक्टर हो गयी । तब भी घर परिवार गांव वाले कहते कि छोरी मुम्बई में क्या काम कर रही है ? फिल्मों में दिखती तो हो नहीं । उन्हें मेरी जाॅब की समझ ही नहीं थी । इसक में मैं क्रिएटिव सुपरवाइजर थी । टी वी सीरीज दिल कुछ कहे से भी जुडी ।


