कार्यकारी निदेशक माइकल सिदीबे के तत्काल इस्तीफे की मांग


नई दिल्ली। गैर सरकारी संगठनों में काम करने वाले स्वयंसेवकों सहित सिविल सोसायटी और सामाजिक संगठनों की लगभग 100 महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने ने प्रेस क्लब आॅफ इंडिया में एकत्रित होकर सिदीबे के पूर्व उपनिदेशक के खिलाफ उसके सहकर्मी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर माइकल सिदीबे, कार्यकारी निदेशक, ज्वाइंट यूनाइटेड नेशन्स प्रोग्राम आॅन एचआईवी एंड एड्स द्वारा उचित कार्यवाही नहीं किए जाने के लिए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन में भारत में विभिन्न वैश्विक और राष्ट्रीय प्रोजेक्ट पर काम करने वाली 40 से अधिक सिविल सोसायटी के सदस्यों ने एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर और समर्थन करके श्री सिदीबे के फौरन इस्तीफे की मांग के समर्थन में एकजुटता का प्रदर्शन किया, उनके इस संयुकत बयान को यून के महासचिव एंटोनियो ग्युटेरेस को भेजा गया था। बीते महीनों में, हुए एक स्कैंडल ने दुनिया के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, द गार्जियन सीएनएन, द लांसेट और एएफपी ने इस बारे में कई तरह की कहानियां प्रकाशित की।
मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि सिदेबी अपने पूर्व उपनिदेशक लूइज लोरेस (कथित आरोपी) का बचाने के लिए दिखावे की एक आंतरिक जांच करवा रहे थे, जिसे पूरा होने में लगभग एक वर्ष का समय लग गया। आंतरिक जांच के परिणामों में सुश्री ब्रोस्ट्राम के आरोपों को बेबुनियाद बताया गया और उनके साथ न्याय करने बजाय उल्टे उन्हीं पर दोष लगाए गए। इस जांच के दौरान, श्री सिदीबे ने भी सुश्री ब्रोस्ट्राम से संपर्क किया और उन्हें अपने डिप्टी के खिलाफ शिकायत वापस लेने के बदले प्रोमोशन देने का लालच दिया। न्याय पाने के पीड़ित के सभी प्रयासों को सिदीबे ने विफल कर दिया और आखिरी में इस जांच को बंद कर दिया गया तथा श्री लोरोस को अपनी नौकरी के बचे महीनों को पूरा करने की अनुमति दी गई।
इंडियन सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी नजर में श्री सिदीबे द्वारा की गई कार्यवाही पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य हैं, उन्होंने अपने पद और अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है। श्री सिदीबे की कार्यवाही उस भरोसे को तोड़ने वाला कदम है, जो पूरी दुनिया की महिलाओं को उन पर था कि उनके अधिकारों और सम्मान की सुरक्षा की जाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय महिला, सुश्री प्रशांति तिवारी ने अपनी बात रखी।
इंडियन सिविल सोसायटी और सामाजिक संगठनों ने भारतीय विकास क्षेत्र और/या नागरिक समाज में महिलाओं के खिलाफ यौन अत्याचार, छेड़छाड़ या बलात्कार के प्रति जीरो टॉलरेंस का समर्थन किया है। सुश्री पी. कौशल्या, प्रेजीडेंट, पॉजिटिव वूमैन्स नेटवर्क ने कहा कि महिलाओं को अक्सर पूरी दुनिया में गलत नजर से देखा जाता है और उन्हें समाज एवं कार्यस्थलों में रोजाना यौन दुराचार की पीड़ा सहन करनी पड़ती है। मुझे आश्चर्य है कि श्री माइकल सिदीबे ने कैसे इतने घिनौने कृत्य का बचाव किया और पीड़ित, जो उनकी सहकर्मी है, को न्याय दिलाने के प्रयसों को ही विफल कर दिया।
यौन उत्पीड़न की शिकार प्रशांति तिवारी ने कहा कि यूएन और इसकी कई एजेंसियों के हाथों ज्यादा से ज्यादा महिलाएं यौन अत्याचार और यौन उत्पीड़न का शिकार बन रही हैं, ये एजेंसियां अपनी शक्तियों और विशेष अधिकारों का उपयोग महिलाओं को अपमानित करने में कर रही हैं। यौन अत्याचार के ऐसे मामलों के व्यापक होने के बावजूद, अभी भी माफ करने की संस्कृति मौजूद है, जिससे इन घिनौने कृत्यों को बढ़ावा मिलता है।

 

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