Expert View : कट्टरवादी सांप्रदायिक हत्याओं के बीच ‘लाल’ होता समाज

 

निशिकांत ठाकुर

उदयपुर में टेलर मास्टर कन्हैया लाल की जिस तरह नृशंस और घृणित हत्या की गई, भारत में संभवतः इसके पहले इस तरह की वारदात न पहले किसी ने सुनी होगी, न ही देखी होगी। उस हत्यारे के पारिवारिक परिवेश, मानसिक जनून, पागलपन की हद का किसी से कोई तुलना नहीं जा सकती। इस प्रकार की नृशंस हत्या को अंजाम तो शायद वही दे सकता है, जो मानसिक रूप से विक्षिप्त है। सभ्य समाज में जीने वाला कोई आम मानव ऐसा कैसे कर सकता है! उसके लिए तो ऐसा सोचना भी अपराध समान लगता है। फिर उसे अंजाम देने के लिए इस हद तक दुर्दांत कैसे हो सकता है। लेकिन, इस विक्षिप्पता और दुर्दांतता की बानगी उस वीडियो में स्पष्ट दिखता है जिनमें दो हत्यारा कन्हैयालाल की हत्या को अंजाम दिया । दोनों की हिम्मत तो देखिए कि वह कितना निडर है कि इस प्रकार की हत्या को अंजाम देने के बावजूद इसका अफसोस नहीं करता है, बल्कि और जोरदारी से प्रधानमंत्री तक के प्रति खुलेआम अपशब्द और अनर्गल प्रलाप करता है । वैसे तो इस प्रकार की हत्या करना तो अब आम प्रचलन में आता जा रहा है, क्योंकि अभी पिछले दिनों महाराष्ट्र के अमरावती में भी इसी मुद्दे को लेकर दवा व्यावसायी उमेश कोल्हे नामक व्यक्ति की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि कोल्हे ने भी नुपुर शर्मा के पक्ष में ट्यूटर पर कुछ लिखा था। वैसे सभी हत्यारे पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं और अब उनके ऊपर कानूनी प्रक्रिया की जा रही है , लेकिन जिस प्रकार हत्या को अंजाम दिया उसकी कल्पना से ही हृदय दहल जाता है शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है।

पिछले दिनों नुपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी देकर अनुरोध किया था कि देशभर में जहां कहीं भी उनके खिलाफ मुकदमे दायर किए गए हैं, उन्हें एक जगह एकत्रित करके एक साथ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो। इसके पक्ष में उन्होंने कारण के तौर पर कहा था कि उन्हें दिल्ली से बाहर जाने पर जान का खतरा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नुपुर शर्मा को फटकारा भी और अर्जी वापस लेने के लिए कहा। अब नुपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में फिर अर्जी डालकर अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को अनुचित ठहराते हुए उनके सारे विवादों को एकत्रित करके एक साथ सुना जाए। ज्ञात हो कि नुपुर शर्मा ने एक खबरिया चैनल पर ज्ञानवापी मस्जिद पर बहस के दौरान मुस्लिम धर्मगुरु मोहम्मद साहब पर अमर्यादित और अनर्गल टिप्पणी की थी ।आइए, समझने का प्रयास करते हैं कि आखिर इन हत्याओं की जड़ में क्या है? दरअसल, उदयपुर और उसके आसपास की मुस्लिम आबादी दस प्रतिशत है। कन्हैयालाल की निर्मम हत्या के बाद उदयपुर ही नहीं, पूरा राजस्थान सदमे में है कि जहां गंगा-जमुनी तहजीब की बात आज तक होती आ रही थी, वहां ऐसा कांड कैसे हो सकता है? जबकि, सच तो यही है कि कन्हैयालाल की निर्ममता पूर्वक की गई जघन्य हत्या से पूरा देश स्तब्ध है और इस आग की लपट उदयपुर तक ही नहीं, पूरे देश में आज अपने शबाब पर है। और, पता नहीं इस आग की तपिश किस—किस को और क्या— क्या न जलाकर राख कर दे । फिलहाल , सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा पर 8 राज्य सरकारों सहित केंद्र सरकार में दर्ज एफआईआर को दिल्ली ट्रांसफर करने के लिए नोटिस जारी कर दिया है और अब सुप्रीम कोर्ट में केस की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी तब तक के लिए नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी और किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्यवाही पर रोक लगी रहेगी। माननीय पीठ ने कहा , हमारी चिंता यह है कि नूपुर को वैकल्पिक कानूनी उपाय करने का मौका मिले । इसके साथ ही पीठ ने नूपुर शर्मा की याचिका पर दिल्ली पुलिस , पश्चिम बंगाल व तेलंगाना आदि सरकारों को नोटिस जारी कर दिया है । नोटिस का जवाब 10 अगस्त तक मांगा है । भविष्य में अगर उनके पूर्व के विवादास्पद बयान को लेकर कोई नई एफआईआर दर्ज होती है तो नूपुर शर्मा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी ।

इस तरह की जो भी घटनाएं हो रही हैं, उसकी बड़ी—बड़ी जांचें होंगी और अपराधियों पर कार्रवाई भी की जाएगी, लेकिन एक बात जो सबसे बड़ी कमी इन घटनाओं में नजर आती है, वह यह कि पुलिस—प्रशासन का इकबाल समाज से कम हो गया है। इसे इस तरह भी कह सकते हैं कि जिनके भय से अपराधी थर– थर कांपा करते थे, आज उनके सामने ही वे अपराध करते हैं और बेरोक –टोक समाज के बीच से बचकर निकल भी जाते हैं। पुलिस—प्रशासन का इकबाल इतना कम क्यों हो गया, इस पर आप यदि स्वयं भी मनन करेंगे तो पाएंगे कि आज सबकी मानसिक प्रवृति ऐसी हो गई है कि वह और अधिक धन किस तरह कमाए, इसी चिंता में डूबा रहता है। यही कारण है कि देखा—देखी में ऐसे अधिकारी भ्रष्टाचार की गिरफ्त में आ जाते हैं और जब एक बार उनके चंगुल में फंस गए तो भ्रष्टाचार का वह चंगुल इतना कठोर होता है कि एक बार उसकी गिरफ्त में आ जाने के बाद उससे निकल पाना लगभग असंभव हो जाता है। हम जिन भ्रष्टाचारियों की बात कर रहे हैं, वे भी हाड़-मांस के ही बने होते हैं। वे कोई हनुमान नहीं होते, जो राक्षस को छकाते हुए मुंह से बाहर निकल जाएं। इसी भ्रष्टाचार रूपी राक्षस ने हमारे सिस्टम के हर कोने के प्रशासनिक अधिकारियों के इकबाल को खत्म कर दिया है। विचार तो इस पर भी होना चाहिए कि भ्रष्टाचार रूपी राक्षस के इस सुरसा मुंह को कैसे बंद किया जाए, अन्यथा इसके कारण लोभी प्रवृति के अधिकारी अपना कर्तव्य पालन करना भूल जाते हैं और फिर उदयपुर और अमरावती तथा देश के कोने—कोने में इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं।

उदयपुर की घटना का आंखों देखा हाल समझते हैं। हमलावर कन्हैयालाल की दुकान में नाप देने के बहाने घुसे थे और उन्होंने बकायदा पूरी घटना का वीडियो भी बनाया। कुछ लोग चाकू और तलवार लेकर दुकान में घुस जाते हैं और पहले कपड़े की नाप देते हैं। कुछ ही देर बाद दुकानदार कन्हैयालाल पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार देते हैं। हत्या के बाद आरोपियों ने ‘सिर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए। कन्हैयालाल की हत्या के दोनों आरोपी रियाज और गौस को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात की जा रही है। घटना के बाद उदयपुर में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। घटना के बाद शहर में इंटरनेट सस्पेंड कर सात थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया। कन्हैयालाल उदयपुर के धानमंडी के भूतमहल के पास सुप्रीम टेलर्स नाम से दुकान चलाते थे। बताया जाता है कि उन्होंने नूपुर शर्मा के पक्ष में पोस्ट किया था, जिसके बाद से उन्हें धमकियां मिल रही थीं और आखिरकार इस्लामी कट्टरवाद ने उनकी जान ले ली।

अब अमरावती की घटना का प्रत्यक्षदर्शी के रूप में समझने का प्रयास करते हैं। प्रत्यक्षदर्शी की बात को यदि मानें तो 21 जून को दवा व्यवसायी उमेश प्रह्लाद रावकोल्हे रात दस से साढ़े दस बजे के बीच अपनी दुकान बंद करके घर के लिए स्कूटर से रवाना हुए थे। उनके पीछे स्कूटर से उनका बेटा संकेत और पत्नी वैष्णवी भी आ रहे थे। बेटे के अनुसार, जैसे ही महिला कालेज न्यू हाई स्कूल का गेट पार किया, दो मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों ने पिता की स्कूटर रोककर बाईं ओर से उनके गले पर बड़े चाकू से वार करना शुरू कर दिया। घायल होकर उनके पिता गिर गए। वह और उसकी मां मदद के लिए गुहार करने लगे। घटना को अंजाम देकर दोनों हत्यारे भाग गए। कुछ राहगीरों की मदद से उमेश को निकट के एक अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उमेश के निकट संबंधियों का कहना है कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। हत्या के समय उमेश की जेब में रखे पैसे भी सुरक्षित थे। उमेश के मोबाइल से नूपुर के समर्थन में व्हाट्सएप संदेश भेजे गए थे। पकड़े जाने पर हत्यारे ने बताया कि हत्या नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने के कारण की गई।

यह गहन विवेचन का विषय है कि पिछले कुछ वर्षों में समाज के बीच जो विष का छिड़काव राजनीतिज्ञों और खबरिया चैनलों के माध्यम से आवाम के दिलोदिमाग में जहर बोया गया, वही अब इन हत्याओं का कारण बन रहा है। अन्यथा कोई कारण नहीं कि हिंदू—मुस्लिम भाईचारे के बीच जो मधुर संबंधों का पुल धीरे—धीरे बंधता नजर आ रहा था, वह कतई नहीं टूटता। लेकिन, दुर्भाग्यवश ऐसा हो नहीं सका। हवा में ही गलत बातों को बार—बार दोहराकर हमारे सोचने—समझने की क्षमता को ही नष्ट-भ्रष्ट कर दिया गया है। एक बौद्ध धर्मगुरु ने बहुत ही उपयुक्त बात कही है कि पारसियों, जैनियों, बौधिष्ठों तथा और कई अल्पसंख्यक हैं, जो कभी नहीं कहते कि उनका धर्म संकट में है– फिर हिंदू यह कहकर लोगों को भ्रमित क्यों करता है कि हिंदू खतरे में है। सच तो यह है कि यह सारी बातें सभी मुद्दे पिछले कुछ वर्षों की देन है, जिसे राजनीतिज्ञ अपनी सत्ता को सुरक्षित बनाए रखने के लिए इस प्रकार के जुमले गढ़ते हैं जिससे देश का नुकसान हो रहा है। हम भी उसी समाज में रहते हैं और अपने समाज की इन गंदगियों को दूर करने में सबसे पहले यदि अपने को निष्पक्ष नहीं बनाएंगे, तब तक इसी प्रकार के निकृष्ट नारे लगाए जाते रहेंगे और समाज में अंदरूनी आग इसी तरह सुलगती रहेगी। यदि इस सांप्रदायिक आग को शांत करना है तो सबसे पहले हमें अपना शुद्धिकरण करना होगा, तभी हम समाज सुधार की बात कर सकते हैं। शुरुआत तो हमें घर से ही करनी होगी।

 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं)

Leave a Reply

Your email address will not be published.