सबसे बड़ी फेफड़े की मानव श्रृंखला बनाने में भारत गिनीज बुक में रिकॉर्ड

कल नई दिल्ली में राजधानी में सबसे बड़ी फेफड़े की मानव श्रृंखला बनाने वाला देश में भारत का नाम शुमार हो गया है। एनसीआर के 5009 बच्चों ने इस रिकॉर्ड को बनाया। इस रिकॉर्ड को गिनीज बुक का सम्मान भी मिला है। इसके लिए हैशटैग माई सॉल्यूशन टू पॉल्यूशन लांच किया गया था।

फाउंडेशन के संस्थापक और संस्थापक सर गंगाराम अस्पताल के सेंटर फॉर टेस्ट सर्जरी के चेयरमैन डॉ. अरविंद कुमार ने हिन्दुस्तान से हुई बातचीत में ब् बताया कि पिछले लंबे अर्से से वह जब भी ऑपरेशन या फेफड़े को देखते थे तो वह पिंक दिखना बंद हो गये थे। यह अक्सर काले होते थे, इसके लिए वह पिछले कुछ सालों से दिल्ली के ही कई स्कूलों में जाकर इस बारे में बच्चों को बता रहे थे।

करीब दस हजार बच्चों को फेफड़ो को इस बारे में जागरूक कर चुके थे। इस आयोजन का भी मकसद कोई रिकॉर्ड बनाना नहीं था, बल्कि लोगों को जागरूक करना था। आयोजन के लिए नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद के 5009 बच्चे शामिल हुए। जिन्होंने पहले फेफड़ों की आकृति बनाई, इसमें बच्चों ने काले गुब्बारों से उसे काला होना भी दिखाया। काले रंग में इस तरह बदला गया कि यह गुलाबी होना संभव नहीं था। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया कि भारत में 2015 में प्रदूषण से संबंधित सबसे ज्यादा 1.2 मिलियन मौतें हुई थी।

उन्होंने बताया कि इसके लिए गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड के अधिकारी भी मौजूद थे। जिन्होंने कार्यक्रम खत्म होने के बाद इस बावत सर्टिफिकेट भी जारी किया। इस तरह मानव श्रृंखला बनाकर भारन ने नवम्बर 2016 में अबूधाबी में बनाये गिये रिकार्ड को तोड़ा। कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, लंग केयर फांउडेशन के राजीव खुराना, फाउंडेशन के बेलाल बिन आसफ समेत कई लोग मौजूद थे।

कार्यक्रम में इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश भी सुनाया गया। राष्ट्रपति ने इस कीर्तिमान के लिए बधाई दी। इस संदेश में लोगों को बताया गया कि प्रदषूण से बचने के लिए लोगों का सलाह दी। वहीं डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि इस आयोजन को 60 हजार से ज्यादा लोगों ने घर बैठे देखा, फाउंडेशन के फेसबुक पर इसे लाइव दिखाया गया था।

 

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