संत शेरसिंह के 37वें महापरिनिर्वाण दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि, प्रो. मनोज कुमार कैन होंगे अंतर्राष्ट्रीय कबीर रत्न अवार्ड से सम्मानित

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी परिसर स्थित कला संकाय में सोमवार को संत शेरसिंह रिसर्च एंड एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा संत शेरसिंह के 37वें महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संत शेरसिंह के सामाजिक योगदान, मानवता और कबीर विचारधारा के प्रचार-प्रसार में उनकी भूमिका को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में ट्रस्ट के पदाधिकारियों, परिजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वैचारिक अनुयायियों ने संत शेरसिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इससे पूर्व दिल्ली देहात के लिबासपुर गांव में भी विशेष श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर उनके सामाजिक कार्यों का स्मरण किया गया।

कबीर विचारधारा के सशक्त संवाहक थे संत शेरसिंह

ट्रस्ट के चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कहा कि संत शेरसिंह कबीर साहेब के सच्चे अनुयायी थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवता, सामाजिक समरसता तथा कुरीतियों के उन्मूलन के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि संत शेरसिंह दिल्ली और हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में कबीर साहेब की वाणी, साखी, बीजक और रमैनी का गायन कर समाज में जागरूकता फैलाते थे।

उन्होंने बताया कि संत शेरसिंह ने छुआछूत, जातिवाद, धार्मिक आडंबर, हिंसा और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया तथा सामाजिक समानता का संदेश दिया।

वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किया आजीवन कार्य

प्रो. सुमन ने बताया कि संत शेरसिंह ने समाज के उपेक्षित, दलित और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने समुदाय भवन निर्माण, भूमिहीनों को आवासीय प्लॉट दिलाने तथा युवाओं को कबीर विचारधारा से जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया।

उन्होंने कहा कि संत शेरसिंह रिसर्च एंड एजुकेशनल ट्रस्ट का उद्देश्य उनके अधूरे सपनों को साकार करना और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।

प्रो. मनोज कुमार कैन को मिलेगा अंतर्राष्ट्रीय कबीर रत्न अवार्ड

इस अवसर पर प्रोफेसर हंसराज सुमन ने घोषणा की कि 11 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रख्यात शिक्षाविद्, कवि, लेखक और आलोचक प्रोफेसर मनोज कुमार कैन को इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय कबीर रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।

उन्हें सम्मान स्वरूप 11 हजार रुपये, शॉल, स्मृति चिन्ह, पटका और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

प्रो. मनोज कुमार कैन वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज के हिंदी विभाग में प्रोफेसर हैं और साहित्य, पत्रकारिता तथा युवा मार्गदर्शन के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान दिया जा रहा है।

20 विभूतियों का होगा सम्मान

ट्रस्ट द्वारा 11 अक्टूबर 2026 को शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली 20 विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा।

इनमें प्रमुख रूप से प्रो. हरिओम दहिया, प्रो. संगीता मित्तल, प्रो. संदीप कुमार, प्रो. प्रमोद कुमार, जज जगमोहन सिंह, डॉ. के. योगेश, प्रो. विंध्यावासिनी पांडेय, डॉ. सुभाष आनंद, डॉ. मनोज वर्मा, श्री देवेंद्र राय और मानसी मिश्रा सहित कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं।

शिक्षा और सामाजिक उत्थान पर ट्रस्ट का विशेष फोकस

ट्रस्ट की उपाध्यक्ष सुश्री पल्लवी प्रियदर्शिनी ने बताया कि ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े बच्चों को शिक्षा से जोड़ना, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा में लाना तथा बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट जनजातीय क्षेत्रों में भी शिक्षा जागरूकता अभियान चला रहा है और भविष्य में छात्रवृत्ति तथा कौशल आधारित शिक्षा कार्यक्रमों का विस्तार करेगा।

विशेष कोचिंग और करियर कार्यशालाओं का प्रस्ताव

दिल्ली विश्वविद्यालय एससी/एसटी, ओबीसी टीचर्स फोरम के अध्यक्ष प्रो. के.पी. सिंह ने ट्रस्ट से दिल्ली के गांवों में गरीब परिवारों के बच्चों के लिए करियर कार्यशालाएं, विशेष कोचिंग क्लास और प्रतियोगी परीक्षा तैयारी केंद्र शुरू करने का प्रस्ताव रखा।

ट्रस्ट ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार करते हुए जल्द इस दिशा में कार्य शुरू करने की प्रतिबद्धता जताई।

संत शेरसिंह के विचार आज भी प्रासंगिक

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज जाति, धर्म और क्षेत्रीयता के आधार पर विभाजन की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में संत शेरसिंह के सामाजिक समरसता और मानवता आधारित विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. योगेंद्र पाटिल ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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