मंगलसूत्र, बिंदिया और मां से डर गया पाक ?

कमलेश भारतीय

लीजिए, पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव की पत्नी और मां को मिला तो दिया लेकिन पूरी तरह अपमानित करके । क्या इसे मुलाकात कहा जा सकता है? बिल्कुल नहीं । यह तो मुलाकात के नाम पर न सिर्फ मजाक है बल्कि सरेआम अपमान है । मुलाकात से पहले कपडे बदलवाए, मंगलसूत्र उतरवाया और यहां तक कि सुहाग की निशानी बिंदी तक नहीं रहने दी । जूते तक बाहर रखवा दिए और फिर लौटाए भी नहीं । मुलाकात भी कांच की दीवार के सामने इंटरकाॅम पर । हद है । मराठी भी नहीं बोलने दी । मां और मातृभाषा दोनों पर रोक लगा दी । न मां सिर पर प्यार से दुलार कर पाई और न ही पत्नी एक छुअन कर पाई । यह कैसी और किस तरह की मुलाकात है ? ऐसी मुलाकात के बारे में पढ़ सुन कर भी सिहरन होती है । कुलभूषण जाधव से दबाब में झूठ भी बुलवाया गया । अपने आप को दोषी बताने का दबाब । पाकिस्तान की इस नापाक हरकत पर मीडिया पूरी तरह से खफा है और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी । मां और पत्नी ने विदेश मंत्री को सारा विवरण दे दिया । जूतों में कुछ छिपाने का भी विरोध किया जा रहा है । पाकिस्तान जो न कह दे वह कम है । यह मानवता की मिसाल के तौर पर है । इससे ज्यादा मानवीय होने की उम्मीद पाकिस्तान से नहीं की जा सकती ।
हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी एक की बजाय दस सार काट कर लाने की बात कहा करते थे । अब जाकर ऑपरेशन आतंकवाद शुरू किया है । कुलभूषण जाधव से जो ज्यादतियों की जा रही हैं , उसका विरोध कैसे करेंगे ?
पाकिस्तान के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोई भी कोशिश रंग नहीं ला सकी । फिर चाहे शपथ ग्रहण समारोह पर नवाज शरीफ को न्यौता देना हो या फिर अचानक यात्रा के बीच पाकिस्तान नवाज शरीफ को मिलने जाना हो । हर कोशिश नाकाम । मां के लिए तोहफे भी कोई असर नहीं दिखा पाए ।
अब सुषमा स्वराज क्या रूख अपनाती हैं , यह देखना होगा । सरबजीत को तो बचा नहीं पाए । काश , कुलभूषण को ही बचा लीजिए ।

 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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