कितना सफल होंगे रजनीकांत राजनीति में ?

रजनीकांत ने कहा कि अपनी पार्टी का ऐलान करते हुए कहा कि वह पीछे नहीं हटेंगे वह कायर नहीं हैं. मैं तमिलनाडु की जनता को नीचे नहीं जाने देंगे.जब विधानसभा चुनाव के समय उचित समय आएगा तब अपनी नीतियों और वादों का ऐलान करेंगे. अगले विधानसभा चुनाव तक हमारी सेना तैयार हो जाएगी.

अनंत अमित

सुपरस्टार रजनीकांत ने बीते रविवार को ही ऐलान किया था कि उनकी पार्टी तमिलनाडु में 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी. क्या तमिल राजनीति में कूद चुके रजनीकांत की पहली परीक्षा कर्नाटक में हो सकती है?भाजपा नेता रजनीकांत को आने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रचार करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं. रविवार को राजनीति में अपनी औपचारिक एंट्री की घोषणा करने वाले रजनीकांत ने कहा था कि उनकी पार्टी तमिलनाडु में 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी.
लेकिन लगता है कि इससे पहले ही भाजपा उनकी लोकप्रियता भुनाने की कोशिश में है. अखबार के मुताबिक तमिलनाडु में भाजपा के सह-संयोजक और कर्नाटक के विधायक सीटी रवि का कहना है, ‘रजनीकांत के साथ जुड़ना भाजपा के लिए हमेशा ही सुखद होता है और हम शुरू से ही रजनीकांत का समर्थन करते रहे हैं.’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल इसे चुनावी रणनीति बताना जल्दबाजी होगी. वहीं, तमिलनाडु में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तमिल इसाई सुंदराजन ने कहा, ‘रजनीकांत की ‘आध्यात्मिक राजनीति’ भाजपा की विचारधारा से मिलती है. हमें तमिलनाडु की नास्तिक-राजनीति को बदल कर उसकी जगह धार्मिक मूल्यों से प्रेरित राजनीति लाने की जरूरत है. रजनीकांत के आने से हमें इस उद्देश्य की प्राप्ति में मदद मिलेगी.’ जानकार बताते हैं कि राजनीति में आने के संकेत दिए जाने के समय से रजनीकांत भाजपा के नजदीक दिखे हैं. लिहाजा अब उनके राजनीति में आने की घोषणा ने भाजपा को मौका दे दिया है.
गौरतलब है कि जयललिता के निधन के बाद दक्षिण की राजनीति में एक लोकप्रिय चेहरे की कमी महसूस की जा रही थी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रजनीकांत इस खाली जगह को भर सकते हैं.
रजनीकांत के राजनीति में आने के फैसले पर अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के मत्स्यपालन मंत्री डी. जयकुमार ने कहा, ‘‘भारत एक लोकतांत्रिक देश है. कोई भी राजनीति में आ सकता है. इसे स्वीकार करना या न करना तो लोगों पर निर्भर है. लोग ही जज होते हैं.’’
वहीं हथकरघा मंत्री ओ. एस. मणियन ने नागपत्तनम में पत्रकारों से कहा कि 67 साल के रजनीकांत की सेहत को देखते हुए हो सकता है कि राजनीति उनके लिए आदर्श जगह न हो. आपको बता दें कि रजनीकांत ने 2011 में सिंगापुर स्थित माउंट एलिजाबेथ मेडिकल सेंटर में अपनी किसी बीमारी का इलाज कराया था. इसके अलावा भी उनका मेडिकल इलाज चलता रहता है. भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष टी. सुंदरराजन ने कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा राजनीति में रजनीकांत का स्वागत किया है.
रजनीकांत ने अपने भाषण के दौरान कई बड़ी बाते कही हैं. रजनीकांत ने कहा कि उनकी पार्टी 2021 विधानसभा चुनावों में सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. साथी ही रजनीकांत ने कहा कि सत्ता में आने के बात 3 सालों के भीतर अगर वो अपने किए गए सभी वादे पूरे नहीं कर पाए तो वो इस्तीफा दे देंगे. सुपरस्टार रजनीकांत यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि उन्हे अपनी पार्टी में कैडर नहीं गार्ड चाहिए, जो गलत होने से रोके. सुपरस्टार रजनीकांत ने कहा कि, तमिलनाडू की हर चाज में अब बदलाव की जरूरत है और वो वही बदलाव लाएंगे. अपने भाषण के दौरान रजनीकांत ने बड़ा खुलासा किया है. रजनीकांत ने कहा कि वो मुख्यमंत्री बनने की लालसा के लिए राजनीति में नहीं आ रहे हैं. रजनीकांत ने बताया कि बहुत पहले उन्हे मुख्यमंत्री बनने का ऑफर मिला था, मगर उन्होंने ये ऑफर ठुकरा दिया था.
तमिलनाडु में चुनाव चार साल बाद होने हैं. ऐसे में रजनीकांत के राजनीति में आने के फैसले को जानकार कर्नाटक से जोड़कर देखते हैं जहां इस साल मई में चुनाव होने हैं. रजनीकांत के भाई सत्यनारायण राव गायकवाड़ बेंगलुरु में रहते हैं. उन्होंने अखबार को बताया कि रजनीकांत हमेशा से ही कर्नाटक के लोगों की सेवा करना चाहते थे. उनका जन्म कर्नाटक में हुआ. वे यहीं बड़े हुए और यहां बतौर बस कंडक्टर भी काम किया. राव बताते हैं, ‘उनका (रजनीकांत) सपना था कि वे उस राज्य की सेवा करें जहां उनकी जड़ें हैं. तमिलनाडु की राजनीति में प्रवेश करने से वे दोनों राज्यों की सेवा कर पाएंगे. हम उम्मीद करते हैं कि दोनों राज्यों के विवादों को सुलझाना उनके लिए आसान होगा.’ सत्यनारायण ने उम्मीद जताई कि रजनीकांत मकर संक्रांति पर अपनी पार्टी का नाम घोषित कर सकते हैं. वहीं, रजनीकांत के भाजपा के लिए प्रचार करने की संभावना पर उन्होंने कहा कि फिलहाल इस टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी.

 

 

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