डॉ धनंजय गिरि
भारतीय राजनीति में लंबे समय से जिस निर्णायक क्षण की प्रतीक्षा की जा रही थी, वह अब सामने आ खड़ा हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय नेतृत्व की बागडोर युवा हाथों में सौंपने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए श्री नितिन नबीन को पार्टी का नया कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। औपचारिक रूप से भले ही इसे अस्थायी व्यवस्था कहा जा रहा हो, लेकिन जिस तरह पार्टी के भीतर और बाहर इस फैसले को व्यापक स्वीकृति और समर्थन मिल रहा है, उससे यह संकेत स्पष्ट हैं कि आने वाले समय में यही नियुक्ति स्थायी स्वरूप भी ले सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी ने एक बार फिर अपने सधे हुए लेकिन दूरगामी फैसले से देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन को भारतीय जनता पार्टी की बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपकर भाजपा ने न केवल तमाम अटकलों पर विराम लगाया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अब निर्णायक रूप से युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की दिशा में बढ़ चुकी है। यह फैसला महज़ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि भाजपा की दीर्घकालिक राजनीतिक सोच और पीढ़ीगत बदलाव का स्पष्ट संकेत है।
नितिन नबीन को यह जिम्मेदारी देकर भाजपा ने यह साबित किया है कि संगठन में साधारण कार्यकर्ता से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने का रास्ता खुला है। यह वही भाजपा है, जहां संगठन और सरकार—दोनों में परिश्रम, निष्ठा और क्षमता को प्राथमिकता दी जाती है। एक बार फिर युवा नेता को आगे लाकर केंद्रीय नेतृत्व ने पूरे देश को यह संदेश दिया है कि नेतृत्व की बागडोर अब धीरे-धीरे नई पीढ़ी के हाथों में सौंपी जा रही है। इसका सीधा अर्थ है कि भाजपा ने भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए आज से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
नितिन नबीन अब तक के सबसे युवा कार्यकारी अध्यक्षों में शामिल हैं। उनके सामने न केवल संगठन को और मजबूत करने की चुनौती है, बल्कि उस युवा देश की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी भी है, जिसकी आबादी का बड़ा हिस्सा आज युवाओं का है। स्वयं नितिन नबीन का यह कहना कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, उनके विनम्र स्वभाव और संगठन के प्रति समर्पण को दर्शाता है। करीब दो दशकों के राजनीतिक सफर में वे पांच बार विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री हैं। संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर उनका अनुभव उन्हें इस भूमिका के लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त बनाता है।
छत्तीसगढ़ के प्रभारी के रूप में जिस तरह उन्होंने संगठनात्मक कामकाज को संभाला, वह केंद्रीय नेतृत्व के लिए भरोसे का आधार बना। यही कारण है कि जब इस पद के लिए कई नाम चर्चा में थे और राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे, तब पार्टी ने नितिन नबीन पर भरोसा जताकर सबको चौंका दिया। यह फैसला इस बात का भी संकेत है कि भाजपा केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन और क्षमता के आधार पर निर्णय लेने में विश्वास रखती है।
यह फैसला केवल संगठनात्मक फेरबदल तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय राजनीति की कार्यशैली, नेतृत्व चयन की परंपरा और भविष्य की दृष्टि में आए एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। अब तक राजनीति में नेतृत्व को उम्र, वरिष्ठता और लंबे राजनीतिक अनुभव से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन भाजपा ने एक बार फिर यह साबित किया है कि उसके लिए क्षमता, कर्मठता और संगठन के प्रति समर्पण ही सर्वोपरि हैं। श्री नितिन नबीन की नियुक्ति इस बदलते राजनीतिक विमर्श की सशक्त अभिव्यक्ति है।
आम लोगों की नजर में भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड का यह निर्णय न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अब तक लिए गए साहसिक, अप्रत्याशित और दूरगामी परिणाम देने वाले फैसलों की श्रृंखला का एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय भी है। श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा लगातार परंपरागत राजनीतिक धारणाओं को तोड़ते हुए नए प्रयोग करती रही है। चाहे वह संगठन में पीढ़ीगत बदलाव हो, शासन में निर्णायकता हो या फिर नेतृत्व को जनआकांक्षाओं से जोड़ने का प्रयास। श्री नितिन नबीन को आगे लाना इसी सोच का विस्तार है।
बिहार विधानसभा चुनाव और उससे पहले प्रदेश संगठन के कई कार्यक्रमों में मुझे उनके साथ काम करने का अवसर मिला है। बोलने से अधिक वे चुपचाप काम करने में भरोसा रखते हैं। संघ के संस्कार में पले बढे समाज के सर्वांगीण विकास की चाहत उनके सीने में है। सियासी गलियारों से लेकर आम जन तक इस नियुक्ति के राजनीतिक निहितार्थ गहरे हैं। एक ओर यह पार्टी के भीतर युवा कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह भरोसा देता है कि मेहनत और निष्ठा का फल शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा सकता है, वहीं दूसरी ओर यह देश की युवा आबादी से सीधा संवाद भी स्थापित करता है। भारत आज एक युवा राष्ट्र है और राजनीति में उसी ऊर्जा और सोच की मांग भी बढ़ रही है। भाजपा का यह कदम उसी सामाजिक यथार्थ को स्वीकार करने और उससे तालमेल बैठाने का प्रयास है।
कुल मिलाकर, श्री नितिन नबीन का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना भारतीय जनता पार्टी की दीर्घकालिक रणनीति और भविष्य उन्मुख सोच का प्रमाण है। यह फैसला न केवल भाजपा के भीतर नई ऊर्जा का संचार करेगा, बल्कि भारतीय राजनीति में यह बहस भी तेज करेगा कि नेतृत्व का मापदंड उम्र नहीं, बल्कि दृष्टि, साहस और कार्यक्षमता होनी चाहिए। यही कारण है कि यह नियुक्ति आज एक खबर भर नहीं, बल्कि आने वाले कल की राजनीति का संकेत बनकर उभरी है।

