बर्तनों की खरीदारी

 

हम अपनों को जाने-अनजाने कई तरह की बीमारियों की चपेट में ले आते हैं। हमारा मकसद आपको डराना नहीं हैं। बस, सचेत करना है कि कहीं बर्तनों की खरीदारी का मोह बीमारियों के रूप में जानलेवा साबित न हो।

 

स्टेलनेस स्टील

माना कि आॅयरन, काॅपर और एल्यूमिनियम को अपनी मजबूती,लंबी आयु जंगरोधकता, प्रयोग में आसान और सस्ते होते हंै। लेकिन गृहणी के लिए इनका प्रयोग मशक्कत भरा होता है। कारण इनका भारी-भरकम वजन। शायद यही वजह है कि गृहणियों का रुझान भारी भरकम बर्तनों की अपेक्षा स्टेलनेस स्टील के हल्के बर्तनों की ओर हो रहा हैै। भले ही स्टेलनेस स्टील के बर्तन के हल्के-फुल्के बर्तन आपको जरूर लुभाते हैं, लेकिन इसकी एक खामी आपको जरूर निराश करती होगी। खामी यह है कि गर्मी का बेहतरीन कंडक्टर नहीं होना। सरल शब्दों में कहें कि थोड़ी सी भी अधिक गर्मी देने से भोजन जल जाता है और काला पड़ जाता है। यही वजह है कि स्टेलनेस स्टील के बर्तनों को अधिक तपिश देने के लिए काॅपर की कलई चढ़ा दी जाती है। इससे ये जलते नहीं है और देखने में भी अच्छे लगते हैं।

एल्युमिनियम

खूबियों से लबालब होते हैं एल्यूमिनियम के बर्तन। यानी हल्के, मजबूत, सस्ते, गर्मी के उत्तम वाहक और सफाई में आसान। एल्यूमिनियम बर्तनों  के यही गुण उन्हें हर गृहणी की जरूरत व पसंद बनाता हैैै। आपको बताएं कि एल्यूमिनियम धातु अत्यंत नरम होता है। इसी कारण तेज एसिड या नमक वाले भोजन के संपर्क में आने पर एल्यूमिनियम घूलने लगता है। इसकी बानगी आपको एल्यूमिनियम के प्रेशर कुकर या साॅस पैन में खटटे पदार्थ उबालने पर मिलेगी। यानी एल्यूमिनियम के बर्तन में बनी खटटे पदार्थों में कसैलेपन का स्वाद आएगा। या यूं कहें कि एल्यूमिनियम  में खटटी पदार्थ बनाने पर यह जल्दी घुलने लगता है,जिससे स्वाद में फर्क भी पड़ जाता है। भले ही खूबियों से भरपूर एल्यूमिनियम  के बर्तन अत्यंत लाभकारी प्रतीत होते हैं, पर भोजन में एल्यूमिनियम की उपस्थिति स्वास्थ्य के लिए बहुत ही घातक होती हैं। अल्जाइमर रोग के कई कारणों में से एक कारण यह भी माना जाता है। इसलिए इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे बर्तनों में चाय, प्यूरी, सांभर, चटनी बनाने से बचना चाहिए।

नाॅन स्टिक कुकवेयर

नए जमाने की पसंद है नाॅन स्टिक बर्तन। आलम यह है कि आज हरेक किचन स्लैब में टेफलाॅन कोटेड नाॅनस्टिक कुकवेयर को प्राथमिकता दी जाती है। इसका कारण है फैट की कम खपत, बर्तनों में भोजन का ना चिपकना और सफाई में आसानी होना। हालांकि इससे जुड़े पीएफओए के कारण यह कई बार विवादों के केद्र में भी रहा है। आपको बता दें कि जहां  नाॅनस्टिक कुकवेयर खूबियों से लबालब हैं, वहीं सेहत के दुश्मन भी। यानी खुरचने से इसके तले से मेटल छूटने, गलत इस्तेमाल से व खाली बर्तन ज्यादा गर्म होने से घातक तत्व  निकल कर भोजन में मिलकर आपके शरीर को हानी पंहुचा सकता है। नाॅनस्टिक कुकवेयर के इस्तेमाल में बुराई नहीं है, लेकिन अपने परिवार को सेहतमंद रखने के लिए खराब पड़ चुके नाॅनस्टिक बर्तनों का इस्तेमाल न करें।

प्लास्टिक बर्तन

माना आज की भागदौड की जिंदगी में गृहणियों को प्लास्टिक बर्तन बहुत लुभाते हैं। कारण इन बर्तनों का वजन में हल्का होना, सफाई में सुविधाजनक, मजबूती इतनी कि गिर के भी न टूटना, पानी से भीग जाने पर भी भोजन का न सडना और अन्य बर्तनों के मुकाबले इन्हें प्लास्टिक बर्तनों का सस्ता होना। इतनी खूबियों के बावजूद कई बार प्लास्टिक बर्तन सेहत बिगाड भी सकते हैं। कई शोधों के अनुसार जब गरम खाद्य पदार्थो को प्लास्टिक के बर्तनों आदि में रखा जाता है, तो प्लास्टिक में से बिसफिनाल-ए यानी बीपीए नामक एक जहरीला रसायन निकलकर खाद्य पर्दार्थों में मिल जाते है। माइक्रोवेव में खाना गर्म करने एवं कंटेनर में रखने प्लास्टिक के अर्क उसमें घुलने लगते हैं। लंबे समय तक प्लास्टिक की बोतल में रखा पानी भी काफी जहरीला हो जाता हैं खासकर कार में रखा पानी कई बार गर्म एवं ठंडा होकर खतरनाक  डाईआॅक्सिक रसायन उगलता है। अधिक से अधिक संख्या मंे प्लास्टिक बर्तन यूज करने से नंपुसकता का खतरा बना रहता है। इसलिए जहां तक हो सकें,प्लासिटक के बर्तनों का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। अगर करना भी पड़े तो अच्छी क्ॅवालिटी के बर्तनों का इस्तेमाल करें।

काॅपर, ब्रास और ब्रोंज

प्राचीन काल से काॅपर, बा्रस और ब्रोंज से बर्तनों का प्रयोग होता आया हैै। बावर्ची हो या गृहणी, दोनों की रसोई में काॅपर, ब्रास और ब्रोंज से बने बर्तनों असीम तवज्जो दी जाती है। शायद इसका कारण है इनका अत्यंत  भारी भरकम नहीं होना, कम समय में तपना और तपिश को त्वरित व और बराबर रूप से बर्तन में फैलना। माना काॅपर, ब्रास और ब्रोंज के बर्तनों की यह खूबी आपको जरूर लुभाती होगी, लेकिन साफ-सफाई करने के बावजूद जल्द ही काले पड़ जाते हैं। यही नहीं इस ओर लापरवाही बरती गई तो सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पडता हैैै। अगली बार काॅपर, ब्रास या ब्रोंज के बर्तन में खाना बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि उनमें नमक व एसिड युक्त भोजन न पकाएं, न परोसें। असल में काॅपर, ब्रास व ब्रोंज  के बर्तन नमक एवं एसिड से मिलकर प्रतिक्रिया करते हैं, जो कि फूड प्वाइजनिंग का कारण बनती है।

कास्ट आयरन

किसी की खूबियां हैं, तो खामियां भी। यही बात बर्तनों पर भी लागू होती है।  कास्ट आयरन के बर्तन भारी तले के होते हैं। इन्हें बजट गडबडाए खरीद सकते हैं, लेकिन जंगरोधक नहीं होने के कारण इन्हें अधिकांश रसोई घर में जगह नहीं दी जाती। ये धीरे-धीरे गर्म होता है। स्टोव व ओवन में पकाने के लिए कास्ट आयरन से बने बर्तनों का प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर फ्राईगं पैन, केतली, कड़ाही  आदि इसी मैटेरियल से बनाए जाते हैं। आर्प ा आपके परिवार में कोई सदस्य एनीमिया से ग्रसित है, तो दवाइयों के साथ कास्ट आयरन के बर्तनों में खाना पकाएं। चौंकिए नहीं। कास्ट आयरन से शरीर में खून की कमी का मात दी जा सकती है। यानी इसमें भोजन बनाने से खाने में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है।

 

 

 

 

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