नई दिल्ली। पूरी दिल्ली कोरोना को लेकर त्राहि त्राहि कर रही है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की ओर से कोरोना लेकर कई प्रकार के गाइडलांइस जारी किए गए हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नाइट कफ्र्यू की बात भी कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जरूरत पड़ने पर दिल्ली में ऐसी कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, जिस प्रकार से बुराड़ी विधानसभा में धड़ल्ले से अवैध भवन निर्माण कार्य जारी है, उस पर किसी प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी का ध्यान नहीं जाता है।
हर ओर परदे से ढककर धड़ल्ले से मकान बनाया जा रहा है। कोरोना काल में इससे प्रदूषण भी फैलता है। न तो इसकी चिंता बनाने वाले ठेकेदारों की है और न ही उनको जिनका मकान बन रहा है। दिल्ली सरकार की ओर से भले ही प्रदूषण के खिलाफ युद्ध का एलान किया गया हो, मगर बुराड़ी में यह कहीं दिखत नहीं है। हर कोई इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
हद तो तब होती है, जब एक दशक पुराने बने यूनिक मकान को तोड़ने के लिए निगम के अधिकारी तैयारी में हैं। बता दें कि झाड़ोदा वार्ड में बहुचर्चित 6 गज के मकान को तोड़ने की बात भी नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह मकान नियम विरूद्ध है। तीन मंजिला मकान बनने के लिए कम से कम 32 गज जमीन होना चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि यह नियम लागू हो तो पता नहीं क्षेत्र के कितने हजार मकान टूट जाएंगे ?
इस संबंध में झाडौदा वार्ड की निगम पार्षद रेखा सिन्हा का कहना है कि जब किसी का मकान या घर बन जाए, तो उसे टूटना नहीं चाहिए। मेरी व्यक्तिगत राय है कि किसी भी मकान में जब लोग रहने लग जाते हैं। उसमें सरकार की ओर से बिजली पानी की सुविधा तक पहुंुचा दी जाती है, उसे किसी भी सरकारी निकाय को नहीं तोड़ना चाहिए। हां, निगम अथवा दूसरी निकायों को यह पहले ही देखना चाहिए कि कौन सा मकान अवैध है या वैध ?
हर ओर परदे से ढककर धड़ल्ले से मकान बनाया जा रहा है। कोरोना काल में इससे प्रदूषण भी फैलता है। न तो इसकी चिंता बनाने वाले ठेकेदारों की है और न ही उनको जिनका मकान बन रहा है। दिल्ली सरकार की ओर से भले ही प्रदूषण के खिलाफ युद्ध का एलान किया गया हो, मगर बुराड़ी में यह कहीं दिखत नहीं है। हर कोई इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
हद तो तब होती है, जब एक दशक पुराने बने यूनिक मकान को तोड़ने के लिए निगम के अधिकारी तैयारी में हैं। बता दें कि झाड़ोदा वार्ड में बहुचर्चित 6 गज के मकान को तोड़ने की बात भी नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह मकान नियम विरूद्ध है। तीन मंजिला मकान बनने के लिए कम से कम 32 गज जमीन होना चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि यह नियम लागू हो तो पता नहीं क्षेत्र के कितने हजार मकान टूट जाएंगे ?
इस संबंध में झाडौदा वार्ड की निगम पार्षद रेखा सिन्हा का कहना है कि जब किसी का मकान या घर बन जाए, तो उसे टूटना नहीं चाहिए। मेरी व्यक्तिगत राय है कि किसी भी मकान में जब लोग रहने लग जाते हैं। उसमें सरकार की ओर से बिजली पानी की सुविधा तक पहुंुचा दी जाती है, उसे किसी भी सरकारी निकाय को नहीं तोड़ना चाहिए। हां, निगम अथवा दूसरी निकायों को यह पहले ही देखना चाहिए कि कौन सा मकान अवैध है या वैध ?

