नासिक। आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक शाखा से जुड़ा मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। महिला कर्मचारियों द्वारा यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों के बाद अब एक पुरुष कर्मचारी ने भी अपनी आपबीती साझा की है, जिसमें उसने मानसिक, धार्मिक और कार्यस्थल पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित कर्मचारी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उसे उसके कुछ सहकर्मियों द्वारा नमाज़ पढ़ने और धार्मिक टोपी पहनने के लिए दबाव डाला गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसकी निजी जिंदगी का मजाक उड़ाया गया और उस पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।
पीड़ित के अनुसार, यह उत्पीड़न वर्ष 2022 में कंपनी जॉइन करने के कुछ समय बाद शुरू हुआ। उसने आरोप लगाया कि उसके टीम लीडर और कुछ अन्य सहकर्मी उसे निशाना बनाते थे, उस पर अतिरिक्त काम का दबाव डालते थे और मानसिक रूप से परेशान करते थे।
इस मामले में पहले से ही दर्ज एक एफआईआर में कुछ आरोपियों के नाम सामने आ चुके हैं। एक महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया था कि उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की गई और उसके धार्मिक विश्वासों को प्रभावित करने का प्रयास हुआ। पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और अब तक कुल नौ मामले दर्ज किए गए हैं।
पीड़ित ने यह भी कहा कि उसकी धार्मिक पहचान को लेकर उसका मजाक बनाया जाता था। उसने आरोप लगाया कि उसके सहकर्मी हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक मान्यताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते थे।
उसने यह भी दावा किया कि नाइट शिफ्ट के बाद उसे होटलों में ले जाकर मांसाहारी भोजन करने के लिए दबाव बनाया जाता था, जबकि वह सख्त शाकाहारी है। मना करने पर उसके विश्वासों का मजाक उड़ाया जाता था।
पीड़ित के अनुसार, 2023 में ईद के दौरान उसे एक सहकर्मी के घर ले जाया गया, जहां उसे जबरन धार्मिक टोपी पहनाकर नमाज़ पढ़ने के लिए कहा गया और उसकी तस्वीरें लेकर कंपनी के समूह में साझा की गईं।
इसके अलावा, उसने आरोप लगाया कि उसकी पारिवारिक स्थिति को लेकर भी उसका मजाक उड़ाया गया और अत्यंत अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि उसके ऊपर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और जब उसने इसका विरोध किया तो उसे नौकरी से निकालने के लिए उसके खिलाफ झूठी शिकायतें की गईं।
हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और संबंधित पक्षों से पूछताछ जारी है।
यह मामला कार्यस्थल पर सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

