तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इतिहास रच दिया है। पहली बार लालू प्रसाद यादव की पार्टी के किसी उम्मीदवार ने केरल विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है। कन्नूर जिले की कूत्तुपरम्बा विधानसभा सीट से राजद उम्मीदवार पीके प्रवीण ने शानदार जीत हासिल कर पार्टी के लिए नया अध्याय खोल दिया है।
केरल में राजद वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) का हिस्सा है। ऐसे में इस जीत को न केवल राजद बल्कि एलडीएफ खेमे के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कूत्तुपरम्बा सीट पर कांटे की टक्कर
कूत्तुपरम्बा विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा।
राजद उम्मीदवार पीके प्रवीण को कुल 70,448 वोट मिले। उन्होंने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की उम्मीदवार जयंती राजन को 1,286 वोटों के अंतर से हराया।
जयंती राजन को कुल 69,162 वोट मिले।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार शिजीलाल तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें 22,195 वोट प्राप्त हुए।
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि केरल जैसे राज्य में, जहां क्षेत्रीय और वामपंथी दलों का दबदबा रहा है, वहां राजद के लिए यह पहली विधानसभा सफलता है।
केरल में किस दल का कैसा प्रदर्शन
निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कांग्रेस नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) बढ़त बनाए हुए है।
अब तक के रुझानों और घोषित परिणामों के मुताबिक:
कांग्रेस : 42 सीटों पर जीत, 21 पर बढ़त
सीपीएम : 20 सीटों पर जीत, 6 पर बढ़त
आईयूएमएल : 9 सीटों पर जीत, 13 पर बढ़त
सीपीआई : 5 सीटों पर जीत, 3 पर बढ़त
केरल कांग्रेस : 6 सीटों पर जीत, 1 पर बढ़त
आरएसपी : 3 सीटों पर जीत
भाजपा : 1 सीट पर जीत, 2 पर बढ़त
इन परिणामों के बीच राजद की एक सीट पर जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है।
कौन हैं पीके प्रवीण?
राजद के विजयी उम्मीदवार पीके प्रवीण पेशे से एक कारोबारी हैं।
चुनावी हलफनामे के अनुसार उन्होंने अन्नामलाई विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) और एम.फिल की पढ़ाई की है।
उनकी संपत्ति का विवरण इस प्रकार है:
चल संपत्ति : ₹1.33 करोड़
अचल संपत्ति : ₹2.05 करोड़
कुल देनदारी : ₹15 लाख
सबसे अहम बात यह है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
राजद के लिए क्यों खास है यह जीत
बिहार केंद्रित राजनीति करने वाली राजद के लिए केरल में यह जीत प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
यह न सिर्फ पार्टी के विस्तार का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर भी राजद अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी दक्षिण भारत में इस तरह अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही, तो आने वाले वर्षों में यह उसके लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।
केरल में जली यह ‘लालटेन’ अब राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गई है।

