नई दिल्ली/कोलकाता। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के रुझानों ने देश की राजनीति को नया संदेश दिया है। पश्चिम बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है, जबकि तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय जोसेफ की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) ने सबसे चौंकाने वाले संकेत दिए हैं। केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ बढ़त बनाए हुए है, जबकि पुडुचेरी में एनआर कांग्रेस-भाजपा गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है।
इन सबके बीच सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार की हो रही है। शुरुआती रुझानों के विश्लेषण से संकेत मिल रहे हैं कि जिन क्षेत्रों में प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावी रैलियां, रोड शो और जनसभाएं कीं, वहां भाजपा को उल्लेखनीय बढ़त मिली है।
मोदी फैक्टर का बड़ा असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांचों चुनावी राज्यों में कुल 29 चुनाव प्रचार कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इनमें से 24 कार्यक्रम केवल पश्चिम बंगाल में हुए।
15 मार्च को चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद से पीएम मोदी ने बंगाल में आक्रामक प्रचार अभियान चलाया।
मुर्शिदाबाद से लेकर कोलकाता और बैरकपुर तक उन्होंने लगातार रैलियों और रोड शो के जरिए चुनावी माहौल को भाजपा के पक्ष में मोड़ने की कोशिश की।
रुझानों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी जिन इलाकों में प्रचार के लिए पहुंचे थे, वहां की 259 विधानसभा सीटों में से 171 सीटों पर भाजपा बढ़त बनाए हुए है।
इसका मतलब है कि मोदी के प्रचार वाले इलाकों में भाजपा का स्ट्राइक रेट करीब 65 प्रतिशत रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंकड़ा पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
19 जिलों में मोदी का चुनावी अभियान
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के 19 जिलों में चुनाव प्रचार किया।
बंगाल चुनाव से पहले उनकी पहली बड़ी जनसभा 14 मार्च को कोलकाता में हुई थी, जबकि अंतिम चुनावी कार्यक्रम 27 अप्रैल को बैरकपुर में आयोजित हुआ।
उन्होंने कुल 24 शहरों और क्षेत्रों में रैलियां और रोड शो किए।
कई जिलों में उन्होंने एक बार प्रचार किया, जबकि कुछ संवेदनशील जिलों में दो से चार बार तक पहुंचे।
उत्तर 24 परगना: सबसे ज्यादा फोकस
उत्तर 24 परगना प्रधानमंत्री मोदी के प्रचार अभियान का सबसे बड़ा केंद्र रहा।
उन्होंने यहां चार बार चुनाव प्रचार किया, जिनमें—
पानीहाटी में प्रचार
दमदम में विजय संकल्प सभा
बनगांव के ठाकुरनगर में रैली
बैरकपुर में अंतिम जनसभा
शामिल रहीं।
इस जिले में कुल 33 विधानसभा सीटें हैं।
2021 चुनाव: भाजपा सिर्फ 5 सीटें जीत पाई थी।
2026 रुझान: भाजपा 17 सीटों पर आगे
यह भाजपा के लिए बड़ी छलांग मानी जा रही है।
कोलकाता में पहली बार बड़ा बदलाव
कोलकाता, जो लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, वहां भी इस बार तस्वीर बदलती दिख रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यहां—
उत्तर कोलकाता में मेगा रोड शो
ठनठनिया कालीबाड़ी दर्शन
बीके पाल एवेन्यू से खन्ना क्रॉसिंग तक रोड शो
दक्षिण कोलकाता और भवानीपुर में रैली की।
कोलकाता जिले में कुल 11 विधानसभा सीटें हैं।
2021 चुनाव: सभी 11 सीटें टीएमसी के खाते में गई थीं।
2026 रुझान: भाजपा 6 सीटों पर बढ़त
यह बदलाव बंगाल की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
हुगली में भाजपा की जबरदस्त बढ़त
प्रधानमंत्री मोदी ने हुगली जिले में दो बड़े चुनावी कार्यक्रम किए—
आरामबाग जनसभा
हरिपाल रैली
इस जिले में कुल 18 सीटें हैं।
2021 चुनाव: भाजपा को केवल 4 सीटें मिली थीं।
2026 रुझान: भाजपा 14 सीटों पर आगे
यह भाजपा की रणनीतिक सफलता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
दक्षिण 24 परगना में टीएमसी के गढ़ में सेंध
दक्षिण 24 परगना लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यहां—
23 अप्रैल को मथुरापुर
24 अप्रैल को जाधवपुर
में रैलियां कीं।
इस जिले में कुल 31 विधानसभा सीटें हैं।
2021 चुनाव:
टीएमसी: 30 सीट
भाजपा: 0
2026 रुझान:
भाजपा 12 सीटों पर आगे
यह भाजपा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
क्या बंगाल में मोदी लहर ने बदल दिया समीकरण?
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़त केवल संगठनात्मक मजबूती का परिणाम नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की सीधी चुनावी सक्रियता ने भी बड़ा असर डाला है।
मोदी की सभाओं में उमड़ी भारी भीड़, राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दों पर केंद्रित भाषण, तथा तृणमूल सरकार पर तीखे हमलों ने चुनावी माहौल को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अंतिम परिणाम भी यही रुझान दिखाते हैं, तो पश्चिम बंगाल में भाजपा की संभावित जीत को ‘मोदी फैक्टर’ की बड़ी राजनीतिक सफलता के रूप में देखा जाएगा।
एक बात स्पष्ट है—
जहां-जहां पीएम मोदी पहुंचे, वहां भाजपा की चुनावी जमीन मजबूत होती नजर आई।
और यही संकेत दे रहा है कि बंगाल में इस बार राजनीतिक इतिहास लिखा जा सकता है।

