स्वदेशी अधिकारों, ILP और जनसांख्यिकीय चिंताओं पर सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करेगी अरुणाचल सरकार: मुख्यमंत्री पेमा खांडू

ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार स्वदेशी जनजातीय अधिकारों, जनसांख्यिकीय चिंताओं, इनर लाइन परमिट (ILP) व्यवस्था के नियमन तथा एपीएसटी (APST) से जुड़े मुद्दों पर सभी हितधारकों के साथ मिलकर ठोस और दीर्घकालिक समाधान तैयार करेगी।

नीति विहार स्थित राज्य भोज सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय परामर्श बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस विचार-विमर्श को “ऐतिहासिक” बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में सामुदायिक संगठनों, छात्र संगठनों, विधि विशेषज्ञों, नागरिक समाज समूहों, राजनीतिक दलों तथा वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया।

करीब साढ़े सात घंटे तक बिना किसी व्यवधान के चली इस मैराथन बैठक में अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (AITF), ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU), एसटी बचाओ आंदोलन समिति (STBAC), विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों तथा गृह, विधि, राजनीतिक और स्वदेशी मामलों से जुड़े विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री ने एसटी बचाओ आंदोलन समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उसने सरकार का ध्यान एक ऐसे लंबे समय से लंबित मुद्दे की ओर आकर्षित किया है, जिस पर वर्षों से चर्चा होती रही, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। उन्होंने कहा कि ये चिंताएं केवल अरुणाचल प्रदेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अवैध प्रवासन, जनसांख्यिकीय बदलाव और स्वदेशी पहचान व संस्कृति पर बढ़ते दबाव से जुड़ी राष्ट्रीय चुनौती का हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त 2025 के लाल किला संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार पहले ही जनसांख्यिकीय असंतुलन और अवैध घुसपैठ को कानून-व्यवस्था, स्वदेशी संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मान चुकी है।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर एक राष्ट्रीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश, पूर्व आईएएस और आईपीएस अधिकारी तथा गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।

प्रमुख मांगों को सैद्धांतिक मंजूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बैठक में उठाई गई चार प्रमुख मांगों को सिद्धांततः स्वीकार कर लिया है। इनमें बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन (BEFR) के तहत इनर लाइन परमिट (ILP) व्यवस्था के प्रबंधन और नियमन के लिए एक अलग विभाग के गठन की लंबे समय से चली आ रही मांग भी शामिल है।

उन्होंने ILP के लिए अलग विभाग बनाने को सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी की घोषणा करते हुए कहा कि यह मांग लंबे समय से AAPSU और STBAC दोनों द्वारा उठाई जाती रही है।

मुख्यमंत्री ने जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के कारण स्वदेशी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पहचान पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर जताई गई चिंताओं को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पर जोर

दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने स्थानीय युवाओं के कौशल विकास और क्षमता निर्माण को प्राथमिकता देने की बात कही, ताकि बाहरी श्रमिकों पर निर्भरता कम की जा सके।

मिजोरम का उदाहरण देते हुए उन्होंने श्रम की गरिमा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ जनजातीय युवाओं को बेंगलुरु में प्लंबिंग और विद्युत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद इन युवाओं ने पासीघाट में 10 लाख रुपये की लागत वाला एक प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा किया, जबकि बाहरी ठेकेदारों ने उसी काम के लिए 18 लाख रुपये का अनुमान दिया था। इससे 8 लाख रुपये की बचत हुई और स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिला।

मुख्यमंत्री ने सभी शीर्ष सामुदायिक संगठनों से कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और जनजातीय युवाओं को इनमें सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

आगे की राह तय करेगी उच्चस्तरीय समिति

बैठक के एक महत्वपूर्ण परिणाम के रूप में मुख्यमंत्री ने एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की, जो चर्चा किए गए सभी मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श कर आगे की कार्ययोजना सुझाएगी।

उन्होंने बताया कि समिति के औपचारिक गठन के लिए 29 मई 2026 को एक अनुवर्ती बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में AITF, AAPSU और STBAC से सात-सात प्रतिनिधियों तथा विधि क्षेत्र से दो से तीन विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सदस्यों के अंतिम चयन के बाद सरकार समिति को आधिकारिक रूप से अधिसूचित करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि समिति द्वारा प्रस्तुत सभी सिफारिशों पर पूरी पारदर्शिता और सामूहिक सहमति के साथ चर्चा की जाएगी, जिसके बाद ही कोई अंतिम नीतिगत निर्णय लिया जाएगा।

“टीम अरुणाचल” की भावना को दोहराते हुए मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सभी हितधारकों से स्वदेशी अधिकारों की रक्षा, सुशासन को मजबूत करने तथा राज्य के दीर्घकालिक विकास, स्थिरता और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

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