कटक: लंबे समय से बंद पड़ी बदाम्बा को-ऑपरेटिव शुगर मिल को दोबारा शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) की पहल से मिल में स्टाफ की नियुक्ति और अन्य तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। 15 साल से अधिक समय से बंद पड़ी इस मिल के फिर से शुरू होने से बदाम्बा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
आईपीएल ने मार्च 2026 में ओडिशा सरकार के साथ बदाम्बा को-ऑपरेटिव शुगर मिल के पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण के लिए करीब 360 करोड़ रुपये के निवेश का समझौता किया था। मिल की गन्ना पेराई क्षमता 3,500 टन प्रतिदिन होगी। इसके साथ 16 मेगावाट का को-जनरेशन पावर प्लांट, 10 टन प्रतिदिन क्षमता वाला बायो-सीएनजी प्लांट और आधुनिक कोल्ड स्टोरेज भी विकसित किया जाना है। इस परियोजना से कटक जिले के बदाम्बा ब्लॉक के करीब 10,000 किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
किसानों के लिए इस परियोजना का महत्व सिर्फ एक बंद मिल के दोबारा खुलने तक सीमित नहीं है। चीनी मिल के संचालन से गन्ने के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार मजबूत होगा और किसानों को गन्ना उगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे क्षेत्र में गन्ने की खेती दोबारा बढ़ने और किसानों की आमदनी मजबूत होने की संभावना है।
आईपीएल का चीनी मिलों के पुनरुद्धार का मॉडल केवल मिल को दोबारा चालू करने पर आधारित नहीं है। कंपनी कृषि से जुड़े पूरे मूल्य शृंखला को मजबूत करने पर जोर देती है। गुजरात में बंद पड़ी तीन सहकारी चीनी मिलों के पुनरुद्धार का अनुभव इसका उदाहरण है। इन मिलों के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार पर आईपीएल ने करीब 305 करोड़ रुपये का निवेश किया। कंपनी ने करीब 300 करोड़ रुपये के पुराने कर्ज का निपटारा किया और कर्मचारियों, विक्रेताओं, किसानों तथा अन्य संस्थाओं के लंबित करीब 40.09 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया। इसके अलावा, गन्ने की बेहतर किस्मों को बढ़ावा देकर गन्ने का रकबा और उत्पादकता बढ़ाने पर भी काम किया गया।
गुजरात का यह अनुभव बताता है कि किसी चीनी मिल का पुनरुद्धार किसानों के जीवन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाल सकता है। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से हजारों किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसी किसान-केंद्रित मॉडल को अब बदाम्बा में आगे बढ़ाया जा रहा है। मिल के शुरू होने के बाद गन्ना खरीद, मिल संचालन, इंजीनियरिंग, रखरखाव, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, प्रशासन और अन्य कार्यों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
इसका असर मिल के बाहर भी दिखाई दे सकता है। गन्ने की खेती बढ़ने से कृषि इनपुट, खेतिहर मजदूरों, कटाई की मशीनों और परिवहन की मांग बढ़ेगी। मिल के संचालन से स्थानीय मैकेनिक, ट्रांसपोर्टर, छोटे कारोबारी, ठेकेदार और अन्य सेवा प्रदाताओं को भी अतिरिक्त काम मिलने की उम्मीद है।
बदाम्बा परियोजना में तैयार किए जा रहे को-जनरेशन पावर प्लांट, बायो-सीएनजी और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं। ये सुविधाएं चीनी उत्पादन के अलावा मिल के लिए अतिरिक्त गतिविधियां और आय के स्रोत तैयार करेंगी।
चीनी क्षेत्र में आईपीएल का अनुभव भी इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है। कंपनी के पास इस समय देशभर में 11 चीनी मिलें हैं। इनमें छह उत्तर प्रदेश, तीन गुजरात और दो ओडिशा में हैं। इन मिलों के माध्यम से कंपनी किसानों के साथ जुड़ी गन्ने की खेती, कृषि प्रबंधन और उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
गुजरात में आईपीएल ने गन्ना उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक खेती, बेहतर सिंचाई, फसल पोषण, किसान प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक पर आधारित पहल भी शुरू की हैं। वहीं, कोडिनार चीनी मिल के आसपास गन्ना किसानों की उत्पादकता और लाभ बढ़ाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों और डिजिटल साधनों के इस्तेमाल पर भी काम किया जा रहा है।
बदाम्बा मिल का पुनरुद्धार बंद पड़ी सहकारी चीनी मिलों को दोबारा आर्थिक गतिविधि से जोड़ने की केंद्र सरकार की व्यापक पहल के अनुरूप भी है। आईपीएल ने गुजरात में सफल रहे पुनरुद्धार मॉडल के आधार पर बंद सहकारी चीनी मिलों को आधुनिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
किसानों के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सीजन के लिए 10.25 प्रतिशत की बेसिक रिकवरी दर पर गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
ऐसे समय में बदाम्बा चीनी मिल का दोबारा शुरू होना क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद और प्रसंस्करण की सुविधा मिलने से किसानों को अपनी फसल के लिए एक मजबूत बाजार मिलेगा। साथ ही मिल से जुड़ी गतिविधियों से रोजगार और आय के अन्य अवसर भी पैदा होंगे।
आईपीएल के लिए बदाम्बा का पुनरुद्धार केवल एक चीनी मिल को फिर से शुरू करने की परियोजना नहीं है। यह बंद पड़ी सहकारी परिसंपत्तियों को दोबारा उपयोग में लाने, किसानों को उनके स्थानीय बाजार से जोड़ने और कृषि पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
मिल में कर्मचारियों की नियुक्ति और संचालन की तैयारियां आगे बढ़ने के साथ बदाम्बा के किसानों और स्थानीय लोगों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। मिल के शुरू होने से क्षेत्र में सिर्फ चीनी उत्पादन ही नहीं, बल्कि गन्ने की खेती, रोजगार, परिवहन, छोटे कारोबार और अन्य सेवाओं को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे बदाम्बा में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों के जीवन में नई खुशहाली लाने का रास्ता खुल सकता है।

