जयपुर। ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक के बहाने जयपुर ने वैश्विक मंच पर राजस्थान की समृद्ध विरासत, संस्कृति, आतिथ्य परंपरा और निवेश की संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। बैठक में जयपुर घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से अपनाया गया। इसके साथ ही ब्रिक्स प्रतिनिधियों ने हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर पैलेस जैसे ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। वहीं, यूएई-राजस्थान टूरिज्म एंड इन्वेस्टमेंट राउंड टेबल के जरिए पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
रामबाग पैलेस में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में करीब 100 कलाकारों ने ‘मेघारंग-द कलर्स ऑफ सावन’ के जरिए भारत की शास्त्रीय और लोक परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया। इस आयोजन ने जयपुर को पर्यटन, संस्कृति और निवेश से जुड़े वैश्विक संवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित किया।
पर्यटन को विकास और सतत विकास से जोड़ने पर जोर
जयपुर में आयोजित यह आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की उस व्यापक सोच को भी सामने लेकर आया, जिसमें पर्यटन को आर्थिक विकास, संस्कृति और सतत विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के संदर्भ में जन-केंद्रित विकास, सतत जीवनशैली, वनीकरण, सर्कुलर इकोनॉमी और समुदाय आधारित अनुकूलन जैसे विषयों पर जोर दिया है। पर्यटन क्षेत्र में भी इसी दृष्टिकोण को लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के माध्यम से आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
ब्रिक्स पर्यटन कार्य समूह की बैठकों में एआई और पर्यटन, सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन, पर्यटन कौशल और क्षमता निर्माण, पर्यटन आदान-प्रदान तथा निर्बाध यात्रा सुविधा जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
जयपुर घोषणा पत्र में जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई, गंतव्य प्रबंधन, आगंतुक सेवाओं, बहुभाषी संचार, पर्यटन निवेश, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समुदाय-केंद्रित पर्यटन को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में शामिल किया गया।
विरासत स्थलों ने कराया राजस्थान की पहचान से परिचय
जयपुर पहुंचे ब्रिक्स प्रतिनिधियों के लिए प्रमुख विरासत स्थलों का भ्रमण भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। प्रतिनिधियों ने हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर पैलेस का दौरा किया और राजस्थान की स्थापत्य कला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा।
इन स्थलों का अनुभव सम्मेलन कक्षों में होने वाली चर्चाओं से अलग राजस्थान को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर था। महलों की वास्तुकला, कलात्मक परंपराओं और जयपुर की जीवंत संस्कृति ने प्रतिनिधियों के सामने राजस्थान की पर्यटन क्षमता की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत की।
पर्यटन के साथ निवेश को जोड़ने की कोशिश
रामबाग पैलेस में आयोजित यूएई-राजस्थान टूरिज्म एंड इन्वेस्टमेंट राउंड टेबल ने पर्यटन को निवेश के अवसरों से जोड़ने का काम किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यूएई की कंपनियों को राजस्थान में ऊर्जा, हॉस्पिटिलिटी और अन्य क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने राजस्थान के किलों, महलों, हवेलियों, रेगिस्तान, अभयारण्यों, जेम्स एंड ज्वेलरी, हस्तशिल्प और टेक्सटाइल को राज्य की प्रमुख ताकत बताते हुए निवेशकों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल-मरी ने राजस्थान के हॉस्पिटिलिटी क्षेत्र में यूएई की कंपनियों की रुचि का संकेत दिया। उन्होंने जयपुर और दुबई के बीच हवाई संपर्क को और बेहतर करने की इच्छा भी व्यक्त की। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को दुबई यात्रा के लिए आमंत्रित किया।
जयपुर घोषणा पत्र से सांस्कृतिक संध्या तक राजस्थान की छाप
जयपुर घोषणा पत्र ने जहां ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन सहयोग का व्यापक ढांचा प्रस्तुत किया, वहीं सांस्कृतिक संध्या ने इस वैश्विक आयोजन को राजस्थान और भारत की सांस्कृतिक विविधता से जोड़ दिया।
प्रतिनिधियों के लिए पारंपरिक कला, शिल्प और समुदाय आधारित पर्यटन पहलों से जुड़े विशेष अनुभव भी प्रस्तुत किए गए। रामबाग पैलेस में आयोजित ‘मेघारंग-द कलर्स ऑफ सावन’ कार्यक्रम में भारत की विविध नृत्य और लोक परंपराओं की शानदार झलक देखने को मिली।
प्रस्तुति में कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी और मणिपुरी जैसे शास्त्रीय नृत्यों के साथ राजस्थान के घूमर, कालबेलिया, भवई, चरी और गैर ने भी अपनी छाप छोड़ी। कठपुतली, छऊ, ढोल और चोलोम जैसी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और व्यापक सांस्कृतिक स्वरूप दिया।
करीब 100 कलाकारों की 40 मिनट की प्रस्तुति में भारत की अनेक सांस्कृतिक धाराएं एक ही मंच पर दिखाई दीं।
वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत हुई जयपुर की पहचान
ब्रिक्स पर्यटन बैठक ने जयपुर को केवल एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में ही नहीं, बल्कि पर्यटन नीति, निवेश, तकनीक, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी सामने रखा।
जयपुर घोषणा पत्र से लेकर विरासत स्थलों के भ्रमण, निवेश संवाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक पूरे आयोजन में राजस्थान की विविध पहचान दिखाई दी। इससे राज्य के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएं तलाशने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने का अवसर मिला है।

